मैं वीर जन्म के उत्सव पर | Main Veer Janm Ke Utsav Par

भजन : मैं वीर जन्म के उत्सव पर, संकल्प करूँगा
लेखक: पंडित संजीव जैन
स्वर:- पंडित संजीव जैन

वीर जन्मोत्सव

मैं वीर जन्म के उत्सव पर, संकल्प करूँगा
दु:खमयी जगत में फिर से ना मैं जन्म धरूँगा।
दृढ निश्चय मेरा, दृढ़ निश्चय मेरा..।

सर्व-जीव समभाव:-

  1. इस जग के सारे प्राणी, भगवान् बन जायें।
    सब जियो सभी को जीने दो, समभाव जगायें।
    जिनधर्म की प्रभावना दिन-रात करूँगा।
    दु:खमयी जगत में फिर से ना मैं जन्म धरूँगा।
    दृढ निश्चय मेरा, दृढ़ निश्चय मेरा..।

अहिंसा:-

  1. हिंसा किसी भी जीव की, मुझसे ना हो जाये।
    ना जाने कब वो जीव, इक दिन सिद्ध बन जाये।
    हिंसा में मूल प्रमाद का अब नाश करुँगा।
    दु:खमयी जगत में फिर से ना मैं जन्म धरूँगा।
    दृढ निश्चय मेरा, दृढ़ निश्चय मेरा..।

अनेकांत:-

  1. एकांत-दृष्टि ने मुझे संसार भ्रमाया।
    हे वीर! तुमने मुझको, अनेकान्त समझाया।
    मैं स्याद्वाद से तत्त्वों अभ्यास करूँगा।
    दु:खमयी जगत में फिर से ना मैं जन्म धरूँगा।
    दृढ निश्चय मेरा, दृढ़ निश्चय मेरा..।

अपरिग्रह:-

  1. इस जग का वैभव हमको, सुख दे नहीं सकता।
    मैं अपने में ही पूर्ण हूँ कुछ ले नहीं सकता।
    परिग्रह की मूर्च्छा का अब, परित्याग करूँगा।
    दु:खमयी जगत् में फिर से ना मैं जन्म धरूँगा।
    दृढ निश्चय मेरा, दृढ़ निश्चय मेरा..।

सत्य:-

  1. ये विश्व बना है सत से फिर मैं झूठ क्यों बोलूं।
    सच बोलने के लिए सदा ही अपना मुख खोलूं।
    मैं तो विवेक से सत्य-असत्य विचार करूँगा।
    दु:खमयी जगत में फिर से ना मैं जन्म धरूँगा।
    दृढ निश्चय मेरा, दृढ़ निश्चय मेरा..।

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