भजन : मैं वीर जन्म के उत्सव पर, संकल्प करूँगा
लेखक: पंडित संजीव जैन
स्वर:- पंडित संजीव जैन
वीर जन्मोत्सव
मैं वीर जन्म के उत्सव पर, संकल्प करूँगा
दु:खमयी जगत में फिर से ना मैं जन्म धरूँगा।
दृढ निश्चय मेरा, दृढ़ निश्चय मेरा..।
सर्व-जीव समभाव:-
- इस जग के सारे प्राणी, भगवान् बन जायें।
सब जियो सभी को जीने दो, समभाव जगायें।
जिनधर्म की प्रभावना दिन-रात करूँगा।
दु:खमयी जगत में फिर से ना मैं जन्म धरूँगा।
दृढ निश्चय मेरा, दृढ़ निश्चय मेरा..।
अहिंसा:-
- हिंसा किसी भी जीव की, मुझसे ना हो जाये।
ना जाने कब वो जीव, इक दिन सिद्ध बन जाये।
हिंसा में मूल प्रमाद का अब नाश करुँगा।
दु:खमयी जगत में फिर से ना मैं जन्म धरूँगा।
दृढ निश्चय मेरा, दृढ़ निश्चय मेरा..।
अनेकांत:-
- एकांत-दृष्टि ने मुझे संसार भ्रमाया।
हे वीर! तुमने मुझको, अनेकान्त समझाया।
मैं स्याद्वाद से तत्त्वों अभ्यास करूँगा।
दु:खमयी जगत में फिर से ना मैं जन्म धरूँगा।
दृढ निश्चय मेरा, दृढ़ निश्चय मेरा..।
अपरिग्रह:-
- इस जग का वैभव हमको, सुख दे नहीं सकता।
मैं अपने में ही पूर्ण हूँ कुछ ले नहीं सकता।
परिग्रह की मूर्च्छा का अब, परित्याग करूँगा।
दु:खमयी जगत् में फिर से ना मैं जन्म धरूँगा।
दृढ निश्चय मेरा, दृढ़ निश्चय मेरा..।
सत्य:-
- ये विश्व बना है सत से फिर मैं झूठ क्यों बोलूं।
सच बोलने के लिए सदा ही अपना मुख खोलूं।
मैं तो विवेक से सत्य-असत्य विचार करूँगा।
दु:खमयी जगत में फिर से ना मैं जन्म धरूँगा।
दृढ निश्चय मेरा, दृढ़ निश्चय मेरा..।