मंगलमय आतम अविकारा, धन्य धन्य जिनशासन प्यारा | Mamgalamay Atam Avikar Dhany Dhany Jinasasan Pyar

तर्ज : झंडा ऊँचा रहे …

मंगलमय आतम अविकारा, धन्य धन्य जिनशासन प्यारा। ।टेक ।।

वीतराग सर्वज्ञ जिनेश, हुए हो रहे होंय हमेश।
श्री निर्ग्रन्थ संत अम्लान, सम्यक्वंत परम गुणखान।।
इसी धर्म में हो सुखकारा । ।1 ।।
ध्येय रूप निर्मल निष्काम, शुद्ध बुद्ध निज आतमराम।
अनेकांतमय ज्ञान बताया, परम अहिंसा धर्म सिखाया।।
गूंजे तिहुँ जग में जयकारा । ।2 ।।
मैत्री भाव सर्व जीवों में, सच्ची करुणा दुःखीजनों में।
गुणीजनों में प्रेम प्रशस्त, विपरीतों में हो माध्यस्थ।।
द्वेष भाव को दूर विडारा । ।३ ।।
दुःख का कारण निज अज्ञान, विषय कषाय महादुःख खान।
इनको त्याग निजातम ध्यावें, सो अक्षय परमानंद पावें ।।
शिवपथ रत्नत्रय सुखकारा । ।4 ।।
जैनधर्म

शिवसुख दाता जैनधर्म, जैनधर्म हाँ आत्मधर्म ।। टेक ।।

नहीं किसी ने इसे बनाया, अरहंतों ने मात्र बताया।
जिन-जिन ने समझा सुख पाया, दुखदायी भव फंद मिटाया।।
प्राणी मात्र का जैनधर्म, शिवसुख दाता जैनधर्म ।। 1 ।।

परम अहिंसा रूप धर्म, सत्य सनातन जैन धर्म।
कुन्दकुन्द का यही धर्म, महावीर का यही धर्म ।।
समन्तभद्र का जैनधर्म, शिवसुख दाता जैनधर्म ।।2।।

श्री दशलक्षण धर्म भक्ति
श्री सिद्धचक्र भक्ति एवं श्री नन्दीश्वर भक्ति


स्रोत: भक्ति-भावना (द्वितीय खण्ड)
Artist: श्री ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’
स्रोत: डॉ. विनोद ‘चिन्मय’
स्रोत: जिन-भक्ति सिंधु, पृष्ठ २६४