मानों मानों जी चेतन यह, विषै भोग छांड देहु,
विषै की समान कोऊ, नाहीं विष आन॥टेक ॥
तात मात पुत्र नार, नदी नाव ज्यों निहार,
जोवन गुमान जानों, चपला समान ॥मानों. ॥१॥
हाथी रथ प्यादे बाज, इनसों न तेरो काज,
सुपने समान देख, कहा गरबान ॥मानों. ॥२॥
ये तो देहके मिलापी, तू तो देहसों अव्यापी,
ज्ञान दृष्टि धर देखि, चेतिये सुजान ॥मानों. ॥३॥
Artist: पं. द्यानतराय जी
स्रोत: आध्यात्मिक भजन संग्रह (सं. श्री सौभाग्यमल जैन, पं. टोडरमल स्मारक ट्रस्ट, जयपुर, २००६), भजन १०९
