मैं दर्शन ज्ञान स्वरूपी हूँ | Main Darshan Jnan Svarupi Hun

मैं दर्शन ज्ञान स्वरूपी हूँ

मैं दर्शन ज्ञान स्वरूपी हूँ, मैं सहजानन्द स्वरूपी हूँ ।।
हूँ ज्ञान मात्र परभाव शून्य, हूँ सहज ज्ञान धन स्वयं पूर्ण
हूँ सत्य सहज आनन्द धाम, मैं सहजानन्द स्वरूपी हूँ ।।

हूँ खुद का ही कर्ता भोक्ता, पर में मेरा कुछ काम नहीं
पर का न प्रवेश न कार्य यहां, मैं सहजानन्द स्वरूपी हूँ ।।
आओ उतरो रमलो निज में, निज में निज की दुविधा ही क्या
है अनुभव रस से सहज प्राप्त, मैं सहजानन्द स्वरूपी हूँ ।।


स्रोत: जैन भजन पूजा पाठ, पृष्ठ २६९