पाना नहीं जीवन को | Pana nhi jeevan ko

पाना नहीं जीवन को, बदलना है साधना।
धुएँ सा जीवन मौत है, जलना है साधना ॥टेक ॥

मुंड मुड़ाना बहुत सरल है, मन मंडन आसान नहीं,
व्यर्थ भभूत रमाना तन पर, यदि भीतर का ज्ञान नहीं,
पर की पीड़ा में मोम सा, पिघलना है साधना।
पाना नहीं जीवन… ॥१॥

मन्दिर में हम बहुत गये पर, मन यह मन्दिर नहीं बना,
व्यर्थ शिवालय में जाना जो , मन शिवसुन्दर नहीं बना,
पल-पल समता में इस मन का, ढलना है साधना।
पाना नहीं जीवन… ॥२॥

सच्चा पाठ तभी होगा जब, जीवन में पारायण हो,
श्वांस-श्वांस धड़कन-धड़कन में, जुड़ी हुई रामायण हो,
तब पर परिणति से चित्त हटा, रमना है साधना।
पाना नहीं जीवन… ॥३॥


स्रोत: मङ्गल भक्ति सुमन (२०१५), पृष्ठ २११

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