म्हारी जिनवाणी मां | Mhari Jinavani Man

म्हारी जिनवाणी मां

म्हारी जिनवाणी मां तो महान् वीरा रे ।
हम सब इसका करें गुणगान वीरा रे ।
देती मुक्ति का मार्ग जिनवाणी माता रे ।
भव्यों आतम को जानो कल्याण होवे रे ।
करलो सिद्ध प्रभु का गुणगान वीरा रे ।। हम सब…
सारे जग में है सार अपनो शुद्धातम रे ।
हमें तो गुरु ने बताया समयसार वीरा रे ।
जीवन थोड़ा है आतम को जान वीरा रे ।। हम सब…
आयो मंगल उत्सव आज नगरी में ।
भरलो ज्ञान की गागर आज नगरी में ।
भविजन गाओ मुक्ति के गीत वीरा रे ।
हम सब इसका करें गुणगान वीरा रे ।


स्रोत: मङ्गल भक्ति सुमन (२०२४), पृष्ठ ८५