मैनासुंदरी की चुनरिया (चुनरिया मोकूँ ऐसी रंगादे मेरे वीर) | Mainasundari Ki Chunariya (Chunariya Moku Aisi Rangade Mere Veer)

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चुनरिया मोकूँ ऐसी मँगाए दे मेरे वीर।

वो सुद्ध हाथ की कती बुनी हो, अजब निराले ढंग की हो।
चहुँ ओर लगी हो रतनात्रय के, गोट तिरंगे रंग की हो।
वो पति भक्ति की लहर पड़ी हो, वो जिन भक्ति की लहर पड़ी।
सत धरम के बूटे संग में हो।
बंदिश का पूरा ध्यान रहे, कोई लहर कहीं पर भंग न हो।
कोनो में चारों ओर बनी होय तस्वीर। ।।1।।

वो मैना सुन्दर सी रानी, दुखियों की सेवा करती हो।
जख्मों को उनके धो-धो कर, फिर मरहम उन पर धरती हो।
धीरज उनके मन बँधा-बँधा, फिर भक्ति भावना भरती हो।
श्रद्धां अटल हो जिनमत का, प्रभु नाम की माला जपती हो।
श्रीपाल हों पास बिराजे, संग सात सौ वीर। ।।2।।

श्री सिद्ध चक्र का मंडल हो, मणियों के द्वारा पुरा हुआ।
भक्ति में अपने जिनवर की हो, मैना का रंग रंगा हुआ।
हो यंत्र न्हवन के पानी का, कलशादि सन्मुख धरा हुआ।
इक चित्र में भैया दिखला देना, सबका संकट टरा हुआ।
दिखलाना ये भी तन की कैसे मिटी थी पीर। ।।3।।

ले सरन पात्र में गंदोदक, सबके तन सती छिड़कती हो।
गंदोदक के छींटे पड़ते ही, सबकी बाधा टलती हो।
वो कुष्ट गलित काया सबकी, वो स्वर्ण सरीखी बनती हो।
सिद्ध चक्र के जयकारे, चहुँ ओर धुंधुभी बजती हो।
धन्य धन्य मैना रानी और धन्य कोटी भट वीर। ।।4।।

मैं ओढ़ चुनरिया को अपनी, सब बहनों को दिखलाऊँगी।
ये जिन भक्ति की महिमा है, मैं सबको समझाऊँगी।
आदर्श सुंदरी मैना का, अपने जीवन में लाऊँगी।
इक गीत चुनरिया का सुंदर, पंकज जी से लिखवाऊँगी।
आशा करेंगे पूरी मन की श्री महावीर। ।।5।।

रचयिता : श्री पंकज जी
स्वर : पण्डित श्री मांगीलाल जी, कोलारस

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स्रोत: JinSwara ऑडियो संग्रह।