महावीर स्वामी हो अन्तरयामी | Mahavir Svami Ho Antarayami

महावीर स्वामी हो अन्तरयामी

महावीर स्वामी हो अन्तरयामी ।
हो त्रिशलानन्दन, काटो भव फंदन ।।
बालही पन में, तप कीना वन में ।
दरश दिखाना, भूल न जाना ।।

पार लगाना, कृपा निधाना ।
महिमा तुम्हारी है जग में न्यारी ।।
सुधि लो हमारी, हो व्रत के धारी ।।

वन खण्ड में तप करने वाले, केवल ज्ञान को पाने वाले ।
सद् उपदेश सुनाने वाले, हिंसा पाप मिटाने वाले ।।
हो तुम कष्ट मिटाने वाले, पशुवन बन्ध छुड़ाने वाले ।
स्वामी प्रेम बढ़ाने वाले, हो तुम नियम सिखाने वाले ।।

पूरण तप को करने वाले, भक्तों के दुख हरने वाले ।
पावापुर में आने वाले, स्वामी मोक्ष को जाने वाले ।।


स्रोत: मङ्गल भक्ति सुमन (२०२४), पृष्ठ ४९