मैं ज्ञानानन्द का दरिया | Main Jnananand Ka Dariya

मैं ज्ञानानन्द का दरिया

मैं ज्ञानानन्द का दरिया, हूँ अनंत गुणों से भरिया
है स्वभाव में इतनी विभूति
तीन काल के अनंत समय में, कभी कमी नहीं होती ।

मैं ज्ञानानन्द का…

मैं एक पूर्ण शुद्ध ज्ञायक रस, घर से भिन्न निराला ।
तीन लोक में सबसे उत्तम, गुण मणियों की माला ।।
शुद्धरूप है मेरा भाई-भाई, उपमा कोई नहिं होती ।मैं… ।।

गुणों का गोदाम है मेरा शक्ति का संग्रहालय ।
सुख शान्ति का समुद्र झलके चिदानन्द चैत्यालय ।।
सिद्ध समान सदा पद मेरो, उर में दृष्टि होती ।मैं… ।।


स्रोत: मङ्गल भक्ति सुमन (२०२४), पृष्ठ २०३