पधारो स्वागत श्रीमान्
आप गुणोदधि ज्ञान उजागर,
है महिमामय करुणा आगर।
धन्य आपको है हम पाकर,
होता हर्ष महान् रे।
हममें नव जीवन आ जावे,
उन्नति होवे दृढ़ता आवे।
गौरव चहुँ दिश में छा जावे,
दूर होय अज्ञान रे।
आभारों से तृप्त हृदय यह,
सादर सविनय करता अनुनय।
क्षमा करेंगे दोष क्षमामय,
आप बड़े धीमान् रे।
धन्य युगल सौभाग्य हमारा,
स्वागत करते बाल तुम्हारा।
हो स्वागत स्वीकार हमारा,
हम हैं बालक नादान रे।
रचयिता: श्री बाबू जुगलकिशोर जैन ‘युगल’ जी, कोटा
स्वर: ओमकार भट्ट
संगीत: अन्वय जैन, दिव्यध्वनि उज्जैन
प्रस्तुति: आचार्य कुन्दकुन्द फाउंडेशन, कोटा
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