मुनि बन आये जी बना
मुनि बन आये जी बना ।
शिव बनरी ब्याहन कौं उमगे, मोहित भविक जना ॥टेक॥
रत्नत्रय सिर सेहरा बांधे, सजि संवर बसना ।
संग बराती द्वादश भावन, अरु दश धर्म पना ॥
मुनि बन आये जी बना ॥१॥
सुमति नारी मिलि मंगल गावत, अजपा गीत घना ।
राग-दोष की अतिशबाजी, छुटत अगनि-कना ॥
मुनि बन आये जी बना ॥२॥
दुविधि कर्म का दान बटत है, तोषित लोकमना ।
शुक्लध्यान की अगनि जला करि, होमैं कर्मघना ॥
मुनि बन आये जी बना ॥३॥
शुभ बेल्यां शिव बनरि बरी मुनि, अद्भुत हरष बना ।
निज मंदिर में निश्चल राजत, ‘बुधजन’ त्याग घना ॥
मुनि बन आये जी बना ॥४॥
Artist: पं. बुधजन जी
स्रोत: nikkyjain.github.io (पं बुधजन कृत भजन)
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