मत कर तू अभिमान | Mat Kar Tu Abhiman

मत कर तू अभिमान

मत कर तू अभिमान रे भाई, झूठी तेरी शान ॥टेक॥

तेरे जैसे लाखों आये, लाखों इस माटी ने खाये,
रहा न नाम निशान, रे भाई ॥
मत कर तू अभिमान, झूठी तेरी शान ॥१॥

माया का अंधकार निराला, बाहर उजला अन्दर काला,
मूरख इसको जान, रे भाई ॥
मत कर तू अभिमान, झूठी तेरी शान ॥२॥

झूठी माया झूठी काया, वही तिरा जिन प्रभु गुण गाया,
जपले वीर भगवान, रे भाई ॥
मत कर तू अभिमान, झूठी तेरी शान ॥३॥

तेरे पल्ले हीरे मोती, मेरे मन मन्दिर में ज्योति,
कौन हुआ धनवान, रे भाई ॥
मत कर तू अभिमान, झूठी तेरी शान ॥४॥

मुश्किल से यह नर तन पाया, जैन धर्म का शरणा पाया,
करले निज कल्याण, रे भाई ॥
मत कर तू अभिमान, झूठी तेरी शान ॥५॥


स्रोत: nikkyjain.github.io (दस धर्म भजन)

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