पारस रे तेरी कठिन ड़गरिया | paras re teri kathin dagariya

पारस रे तेरी कठिन ड़गरिया।
किस विधि मैं तुझे पाऊँ रे साँवरिया।।टेक।।

कठिन तुझे आहार कराना, अंतराय से कठिन बचाना।
कठिन जिमाना बिन प्याली बिन थलिया…।।१।।

कठिन महल तज वन को जाना, कठिन रात-दिन ध्यान लगाना।
तप अति कठिन,कठिन मुनिचर्या…।।२।।

मोक्ष जहाँ से गया तू जिनराई, उस पर्वत की कठिन चढ़ाई।
तू ही ले चल मेरी थाम के गरिया…।।३।।