मैं ज्ञान मात्र बस, ज्ञायक हूँ | mai gyan matra bas gyayak hun

मैं ज्ञान मात्र बस, ज्ञायक हूँ, आनंदमयी बस ज्ञायक हैं।
ज्ञान में ही बस रमेंगे -२, मुक्ति पाने के लिए।
मोह तज निज को वरेंगे, निज में समाने के लिए।।टेक।।

आत्मा ही ज्ञेय है बस, आत्मा ही ज्ञान है;
आत्मा ही ध्येय है बस, आत्मा ही ज्ञान है ।
चाह कुछ बाकी नहीं है, मुक्ति पाने के लिए ।। मोह तज…।।१।।

ज्ञेय जैसा ज्ञान होता, ज्ञान ज्ञेयाकार है;
किन्तु वह परमार्थ से ही, ज्ञान का आकार है ।
ज्ञान को ही ज्ञान जाने, मुक्ति पाने के लिए ।।
मोह तज… ।।२।।

विषय सुख अब नहीं हैं भाते, ज्ञेय की वाँछा नहीं;
स्वर्ग की भी कामना मन में, सुहाती है नहीं ।
स्वर्ग में ही स्वयं की सृष्टि रचाने के लिए ।। मोह तज…।।३।।

Singer : @Asmita_Jain

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Jai jinendra🙏do you have any audio file of this bhakti…?

@Arun_Jain Ji, do we have audio of this bhakti?

Let me search …And post if available

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is there a audio for this bhakti?

@Indira @Arun_Jain @ANCHAL
The audio recording for this bhajan has been updated.

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Isme para ki second line mein “आत्मा ही ध्यान है”
Hona chahiye ya nahi?

how can I download bhaktis that I like? please advise thanks

Jai Jinendra, Please click on the three dots beside a bhakti audio player to download the specific bhajan.