भोगांरा लोभीड़ा, नरभव खोयौ रे अजान
(राग - सोरठ)
भोगांरा लोभीड़ा, नरभव खोयौ रे अजान ॥ भोगांरा. ॥ टेक ॥
धर्मकाजकौ कारन थौ यौ, सो भूल्यौ तू बान ।
हिंसा अनृत परतिय चोरी, सेवत निजकरि जान ॥ १ ॥ भोगांरा. ॥
इन्द्रीसुखमैं मगन हुवौ तू, परकौं आतम मान ।
बन्ध नवीन पड़ै छै यातैं, होवत मौटी हान ॥ २ ॥ भोगांरा. ॥
गया न कछु जो चेतौ बुधजन, पावौ अविचल थान ।
तन है जड़ तू दृष्टा ज्ञाता, कर लै यौं सरधान ॥ ३ ॥ भोगांरा. ॥
Artist: पं. बुधजन जी
स्रोत: आध्यात्मिक भजन संग्रह (सं. श्री सौभाग्यमल जैन, पं. टोडरमल स्मारक ट्रस्ट, जयपुर, २००६), भजन २०
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