मधुबन एवं उदयपुर गीत
- डॉ. विवेक जैन, छिंदवाड़ा
मधुबन (सम्मेद शिखर) एवं उदयपुर के भजन, प्रथम भजन “जय जय जय जिनवर”। पूर्ण संग्रह का पाठ नीचे, मूल PDF अंत में संलग्न।
Bhajans on Madhuban (Sammed Shikhar) and Udaipur by Dr. Vivek Jain, Chhindwara. Full text below, original PDF attached at the end.
अनुक्रमणिका
१. जय जय जय जिनवर
जय जय जय जिनवर हो..हो… जय जय जय जिनवर
कोरस - जय जय जय जिनवर हो..हो… जय जय जय जिनवर
अंतरदृष्टि तुम सम होवें… अंतरदृश्टि तुम सम होवें दो मुझको वह वर…
जय जय जय जिनवर हो…
● विशद स्वच्छ दुति आप जिनेश्वर रागद्वेष मय मल से हीन ।
निर्मल दर्पण तुल्य स्वभावी, सुख दुःख समरस निज आधीन ॥
वीतराग सर्वज्ञ जिनेश्वर… त्रिभुवन स्वामी प्रवर…
● हे जिनेन्द्र तुम सम दृश्टि धर, योगीजन निज को ध्याते ।
तुम प्रभाव से तज विभाव वे, तेरे ही सम हो जाते ॥
मोह अंधेरा हरने वाले…अविनाशी दिनकर…
● केवल एक आपने प्रभुवर मार्ग मुक्ति का दिखलाया ।
औरों ने तो चारों गति में सदा भटकना सिखलाया ॥
अशरण लागा सारा जग अब… आया तेरे दर…
● कालदा” का रोना गाकर मैंने काल अनन्त गंवाया ।
निज वैभव पर दृश्टि न डाली, नश्वर वैभव पर ललचाया ॥
मार्ग दिखादो ऐसा प्रभुवर… पाये मुक्ति घर…
१९. आत्म अनुभव नित रमण करते सदा
आत्म अनुभव नित रमण…आत्म अनुभव नित रमण करते सदा मुनिराज है ।
मुक्ति पथ अनुरागी गुरूवर सौख्य के साम्राज्य है ॥
आत्म अनुभव नित रमण…आत्म अनुभव नित रमण करते सदा मुनिराज है ।
मुक्ति पथ अनुरागी गुरूवर सौख्य के साम्राज्य है ॥
सौम्य मुद्रा भांत छवि नित दे कह रही उपदेश यह ।
सौम्य मुद्रा भांत छवि नित दे कह रही उपदेश यह …
देख निज की ओर क्षण भर सौख्य का सागर बहे ॥
सहज ज्ञायक भाववर्ती साम्य रस की धार है…
आत्म अनुभव नित रमण…आत्म अनुभव नित रमण करते सदा मुनिराज है ।
मुक्ति पथ अनुरागी गुरूवर सौख्य के साम्राज्य है ॥…लेडीज
दृश्टि में ध्रुव एक ज्ञायक आत्म अनुभव लीन है । … लेडीज
दृश्टि में ध्रुव एक ज्ञायक आत्म अनुभव लीन है ।
विशय चाह से रहित मुनिवर, परम सुख स्वाधीन है ॥
चलते-फिरते सिद्ध प्रभु को वंदना भात बार है…
आत्म अनुभव नित रमण…आत्म अनुभव नित रमण करते सदा मुनिराज है ।
मुक्ति पथ अनुरागी गुरूवर सौख्य के साम्राज्य है ॥…जेंटस
राग का न लेश जिनके धारे न कोई वेश है । …जेंटस
राग का न लेश जिनके धारे न कोई वेश है ।
रत्नत्रय भूशण से भोभित एक मुनि का भ’’ है ॥
स्वानुभव के गिरि शिखर से बह रही सुखधार है…
आत्म अनुभव नित रमण…आत्म अनुभव नित रमण करते सदा मुनिराज है ।
मुक्ति पथ अनुरागी गुरूवर सौख्य के साम्राज्य है ॥…महिला
रचियता - डॉ. विवेक जैन, छिंदवाडा
२३. धारा है दिगम्बर वेश
धारा है दिगम्बर वेश …हो ओ…धारा है दिगम्बर वेश
किया मुक्ति श्री में प्रवेश… वो मुनिवर चल पड़े…
धारा है दिगम्बर वेश… किया मुक्ति श्री में प्रवेश… वो मुनिवर चल पड़े…
धारा है दिगम्बर वेश… किया मुक्ति श्री में प्रवेश… वो मुनिवर चल पड़े…
वो मुनिवर चल पड़े…
नहीं राग तंतु कुछ शेष, परिग्रह अरु राग न द्वेष.. वो मुनिवर चल पड़े…
सब राज्य पाठ त्यागा… समता धन के स्वामी ।
चक्री झुकते पग में, वंदन अंतर यामी ॥
बहती उपशम रस धार, त्यागा सुत तिय परिवार ।
वो मुनिवर चल पडे… वो मुनिवर चल पडे…
दिन रात आत्म चिंतन… समभावमयी जीवन ।
निर्ग्रन्थ दशा कहती कितना पावन है मन ॥
देता जीवन संदेश, सुख अंदर बाहर क्लेश ।
वो मुनिवर चल पडे… वो मुनिवर चल पडे…
हे भााश्वत् सुख भोगी… भाुद्धात्म विलासी हो ।
वैराग्यमयी जीवन, निज भाव प्रकाशी हो ॥
भव भोग से वैरागी, व्रत धारी बड़भागी ।
वो मुनिवर चल पडे… वो मुनिवर चल पडे…
विशयों की आश न मन… परिग्रह का लेश नहीं ।
तप ज्ञान ध्यान जल से परणति है नित भीगी ॥
धनि वनवासी मुनिराज, मुक्ति रमणी सिरताज ।
वो मुनिवर चल पडे… वो मुनिवर चल पडे…
रचियता - डॉ. विवेक जैन, छिंदवाडा
२. श्री जिनवर की दिव्य देशना
श्री जिनवर की दिव्य देशना… श्री जिनवर की दिव्य देशना फैला रहा जहान में ।
मंगलमयी जिनशासन ध्वज ये लहराता है शान से ॥
मंगलमयी जिनशासन ध्वज ये लहराता है शान से ॥
लहराता लहरायेगा लहरा रहा जहान में…
मंगलमयी जिनशासन ध्वज ये लहराता है शान से ॥
अनेकांत की वस्तु व्यवस्था का घोतक जग में न्यारा ।
स्याद्वाद चिह्नों से अंकित केशरिया ध्वज अति प्यारा ॥
मुक्ति मार्ग का दिग्दर्शक ये भव्य कहें बहुमान से…
लहराता लहरायेगा लहरा रहा जहान में…॥1॥
रत्नत्रय के पावन नभ पर फहराता है मन भावन ।
सिद्धालय की ओर बढे जो उनकी परिणति हो पावन ॥
पाये भविजन भव का किनारा मिला मुक्ति सोपान है…
लहराता लहरायेगा लहरा रहा जहान में…॥2॥
नव देवों में एक जिनालय जिसकी भाोभा का नायक ।
मोह तिमिर क्षय करने वाला भााश्वत सुख का परिचायक ॥
भेदज्ञान का दीप जला अब फैला सम्यग्ज्ञान है …
लहराता लहरायेगा लहरा रहा जहान में…॥3॥
जिनशासन की गौरव गाथा का यह बोध कराता है ।
निर्ग्रन्थों का अनुगामी ही महा मोक्ष पद पाता है ॥
मैं स्वभाव से सिद्ध स्वरूपी जागा निज सम्मान रे…
लहराता लहरायेगा लहरा रहा जहान में…॥4॥
सीमंधर संदेश सुनाने कुन्दकुन्द मुनिवर आये ।
धन्य धन्य गुरूवर कहान निज ज्ञायक परिचय करवाये ॥
अध्यात्म भवन के ज्ञान शिखर पर फहरा रहा है भाान से…
लहराता लहरायेगा लहरा रहा जहान में …॥5॥
रचियता - डॉ. विवेक जैन, छिंदवाडा
६. आया पंचकल्याणक महान
आया पंचकल्याणक महान आया पंचकल्याणक महान ।
कोरस --आया पंचकल्याणक महान आया पंचकल्याणक महान ।
जन्म मरण दुख क्षय कर हम भी…
जन्म मरण दुख क्षय कर हम भी… पायें पद निर्वाण ॥
जग तारक प्रभु तीर्थेश्वर का अंतिम जन्म महा सुखमय ।
स्वयं तिरे प्रभु भवसागर से हमकों तारो यही विनय ॥
ज्ञान दिवाकर उदित हुआ अब पाओ सम्यग्ज्ञान …
आया पंचकल्याणक महान आया पंचकल्याणक महान ।
निरख निरख छवि बाल प्रभु की सुरपति आनंद उर भारी ।
रूप अनुपम प्रभु बालक का लख भाचि लेती बलिहारी ॥
हिल मिल नृत्य करें सब भविजन गावें मंगल गान …
आया पंचकल्याणक महान आया पंचकल्याणक महान ।
गुण अनंत के धारी प्रभुवर अंतर परणति क्या कहना ।
तीन ज्ञान संग ले जन्मे प्रभु पहने रत्नत्रय गहना ॥
धन्य धन्य है भाग्य हमारे मिला मुक्ति वरदान …
आया पंचकल्याणक महान आया पंचकल्याणक महान ।
ज्यों पारस से संस्पर्शित हो लोह स्वयं पारस होता ।
त्यों जिनवर के दर्श मात्र से मोह अंधेरा क्षय होता ।
आप कृपा से जागे वह बल मैं भी बनूं भगवान…
आया पंचकल्याणक महान आया पंचकल्याणक महान ।
रचियता - डॉ. विवेक जैन, छिंदवाडा
११. बहती आनंद रस की धारा
बहती आनंद रस की धारा माता अंतर में ।
कोरस… बहती आनंद रस की धारा माता अंतर में…
बहती आनंद रस की धारा माता अंतर में,
कोरस… बहती आनंद रस की धारा माता अंतर में…
गर्भ क्या माँ का ये तो मंगल जिनालय ।
सिद्ध पुरी के स्वामी का ये आलय ॥
मानो मुक्ति गर्भ में आई हो ऽऽ माता के उर में …
धन्य है त्रिभुवन माता भोभा है न्यारी ।
भाचि इन्द्राणी माँ की लेत बलिहारी ॥
लिया चिंतामणी अवतार हो ऽऽलिया चिंतामणी अवतार माता के उर में …
न्हवन कराओं माँ का आज सखी प्यारी ।
झलके है चैतन्य दर्पण मात छवि प्यारी ।
चमकें रत्नत्रय का हार… हो ऽऽ चमकें रत्नत्रय का हार माता के उर में …
दशदिश छाये खुशियाँ बाजे भाहनाई ।
जन्म महोत्सव की भाुभ घड़ी आई ॥
जन्मी चेतन परणति आज हो ऽऽ जन्मी चेतन परणति आज माता के उर में
रचयिता - डॉ. विवेक जैन, छिंदवाडा
८. उड़ उड़ रे म्हारी ज्ञान चुनरिया
उड़ उड़ रे उड़ उड़ रे उड़ उड़ रे उड़ उड़ रे
उड़ उड़ रे म्हारी ज्ञान चुनरियॉं
तारणहारा प्रभुजीघर आवे, तारणहारा प्रभुजी घर आवे रे आवे
तारणधरा प्रभु जी घर आवे
कोरस : उड़ उड़ रे म्हारी ज्ञान चुनरियॉं, तारणहारा प्रभुजी घर आवें
तारणहारा प्रभुजी घर आवें
स्वर्ग पुरी से प्रभु जी पधारे हो ऽ ऽ.. जग को मुक्ति मार्ग बताये ।
कण कण में…कण कण में छाई है खुशियाली ॥
तारणहारा प्रभुजी घर आवे …रे आवे तारणहारा प्रभुजी घर आवें
कोरस : उड़ उड़ रे म्हारी ज्ञान चुनरियॉं, तारणहारा प्रभुजी घर आवें
तारणहारा प्रभुजी घर आवें
समकित सुंगधी दश दिश महके होऽ ऽ.. चैतन्य परणति पंछी चहके ।
दुल्हन सी… दुल्हन सजी नगरी प्यारी ॥
तारणहारा प्रभुजी घर आवे …रे आवे तारणहारा प्रभुजी घर आवें
कोरस : उड़ उड़ रे म्हारी ज्ञान चुनरियॉं, तारणहारा प्रभुजी घर आवें
तारणहारा प्रभुजी घर आवें
त्रिभुवनपति की भाोभा न्यारी होऽ ऽ.. अंतरपरणति निजरस पागी ।
मुक्ति का… मुक्ति का मार्ग पाये नर नारी ॥
तारणहारा प्रभुजी घर आवे …रे आवे तारणहारा प्रभुजी घर आवें
कोरस : उड़ उड़ रे म्हारी ज्ञान चुनरियॉं, तारणहारा प्रभुजी घर आवें
तारणहारा प्रभुजी घर आवें
रचयिता - डॉ. विवेक जैन, छिंदवाडा
९. वाराणसी में गर्भकल्याणक
वाराणसी में गर्भ कल्याणक हर्श छा गया,
नाचो सारे झूमो सारे, तीन लोक का नाथ आ गया
१. घोलो केसर रंग गुलालजी…२
गाओ सब मिल मंगलाचारजी…२
कर्म भूमि में कल्प तरू मानो आज आ गया
नाचो सारे…वाराणसी में…
२. जाने अपना, ज्ञान स्वभाव जा…२
माने निज को, ज्ञायक भाव जो…२
भव्य जनों के पुण्यफलों का काल आ गया
नाचो सारे…वाराणसी में…
१० आलाप : हे…हे…हे जी रे…
छाई खुशहाली नगरी में आज
वाराणसी में मंगल प्रभात हो जी रे…
३. इंद्र-इंद्राणी सब मिल आये
उत्सव मनाये आज रे, आया जन्म कल्याण आज रे
झूम रही हैं, धरती सारी झूम रहा आकाश रे, आया जन्म…
४. चलो सब मिल, चलों वाराणसी…२
जाने फिर कब आयें ये अवसर…२
जन्म मरण के क्षय करने का स्वकाल आ गया
नाचो सारे… वाराणसी में…
२४. बनारस में बज रही बधइयां
बनारस में बज रही बधइयां, बनारस में बज रही रे ओ…हो…होकृ
यहां जन्में हैं पारस ललना, यहां जन्में है देखो पारस ललना…
१. तीन-तीन ज्ञान धारी ललना, तीन-तीन ज्ञान धारी हो…ओ…हो
इन्द्र कुबेर स्वर्गपुरी में करते हैं रत्नों की वर्शा
बनारस में बज रही बधइयां, यहां जन्में हैं पारस ललना,
यहां जन्में है देखो पारस ललना…२
२. छप्पन कुमारियां आई, अश्ट देवियां ओ…हो…हो
रात दिना करें मां की सेवा, वामा माता की सेवा
बनारस में बज रही बधइयां, यहां जन्में हैं पारस ललना,
यहां जन्में है देखो पारस ललना…२
३. अन्तिम जन्म धारी ललना, अन्तिम जन्म धारी हो…ओ…हो
गर्भ, जन्म, तप, ज्ञान कल्याणक, देव मनाएं मोक्ष कल्याणक
बनारस में बज रही बधइयां, यहां जन्में हैं पारस ललना,
यहां जन्में है देखो पारस ललना…
२५. आई आई देखो आई, नगरी में प्रतिश्ठा आई
आई आई देखो आई, नगरी में प्रतिश्ठा आई
तीर्थंकर जन्म की घड़ी रे, हर्श की घड़ी ये आ गई रे
त्रिभुवन के नाथ आएं, सुर नर गुणगान गाऐं
रत्नों और पुश्पों की झड़ी रे, हर्श, हर्श की घड़ी रे
आई: आई …
अद्भुत है, लाल माई, नरको में भाांती हाई
तीर्थंकर जन्म की घड़ी रे, धन्य धन्य ये घड़ी रे
आई: आई …
तेजवान ज्ञानवान, जिनशिशु हैं, पुण्य वान
महिमा महान बाल की है, तीर्थंकर सुतबाल की रे
आई: आई …
दैवीय बाद्ध बजें, इंद्र भाची नृत्य करें
तीर्थंकर जन्म की घड़ी रे, हो रही प्रभावना बड़ी रे
आई: आई …
२६. तीर्थंकर सुत जन्म लियो है, वामा मॉं के अंगना
तीर्थंकर सुत जन्म लियो है, वामा माँ के अंगना
हो आज जन्म लियो ललना जन्मलियो आज जन्म लियो ललना
रून-झुन, रून-झुन, रून-झुन, रून-झुन बाजे पैजनिया
बधाई वामा मैयाए बधाई हो, बधाई वामा मैया
ज्ञानवान है जो तेजवान है, जो अनंत गुणों की खान है
तीनों लोकों में उपमा नहीं है, तेरी गोदी में माँ भगवान है
महापुण्यशाली ललना है, वामा माँ के अंगना
हो आज जन्म लियो…
सौधर्म भाची सब आऐ, बाल प्रभु को निरख हरशाये
अरी नेत्र सहस्त्र बनाऐं, संतृप्त नहीं हो पाऐं
नारकियों को मिली भाांती है, अद्भुत माँ का ललना
हो आज जन्म लियो …
चैतन्य शिखर है, शिशु जिन, सारी धरती थी व्याकुल प्रभु बिन
जिन भाासन की होगी प्रभावना, आज पूरी हुई है भावना
भाुभ्र ज्योत्सना फैल रही है, धनि-धनि जिनवर ललना
ळो आज जन्म लियो …
सूची
२७. परम वीतरागी हे जिनदेव मेरे, हे जिनदेव मेरे
परम वीतरागी हे जिनदेव मेरे, हे जिनदेव मेरे
हे जिननाथ मेरे, परमवीतरागी
अहो भाांत मुद्रा जिनेश्वर तुम्हारी, अनुपमेय, नासाग्र दृश्टि के धारी ।
अहो नाथ वाणी है कल्याणकारी, महा सौख्यकारी महा सौख्यकारी ॥
परम वीतरागी…
तुम्ही ब्रम्हा, विश्णु महेश्वर तुम्ही हो, कैवल्यधारी हिंतकर तुम्ही हो ।
निजानंद भोगी अर्हन तुम्ही हो, सुखकर तुम्ही हो सुखकर तुम्ही हो ॥
परम वीतरागी…
अहो द्रव्य दृश्टि से मैं भी तुम्ही सम, प्रभुतामई पूरा परमातम ।
तुम्हारी ही वाणी से जाना हे भगवन्, श्री देव अर्हन् श्री देव अर्हन ॥
परम वीतरागी…
१०. जागो जी माता जागन घड़ियॉं
जागो जी माता जागन घड़ियॉं आई -२
उदयाचल से भानू जागा, नव किरणें उमगाई -२
जागो जी माता जागन घड़ियॉं आई -२
सृश्टि का श्रृंगार मनोरम गाते पंक्षी मधुरिम - मधुरिम -२
प्रात लालिमा छाई
जागो जी माता जागन घड़ियॉं आई -२
सुरबालायें मिलकें उठायें, मधुरिम स्वर में गीत सुनायें - २
तज दो भायन वामा माई
जागो जी माता जागन घड़ियॉं आई -२
सुखकारिणी - हितकारिणी माता, रत्न कुक्षी धारिणी जगमाता - २
नारी में श्रेश्ठ कहाई
जागो जी माता जागन घड़ियॉं आई -२
२८. सुस्वागत है अहो भविजन, ये कल्याण सुहावना
सुस्वागत है अहो भविजन, ये कल्याण सुहावना ।
अहो निर्दोश जिन भाासन, करो इसकी प्रभावना ॥
सुस्वागत है … अहो भविजन
वंदन है कोटि वंदन हे पारसजिन हमारा ।
घड़ियॉं ये आगमन की, हर्शित त्रैलोक्य सारा ॥
हर्शित त्रैलोक्य सारा…
ये गर्भोत्सव शिशुजिन का मनाऐगें सुभावना ।
सुस्वागत है अहो… अहो निर्दोश जिनशासन …
जन्मेंगे नाथ जिस क्षण, त्रैलोक्य भाांति पायें ।
नरकों में भी घड़ी भर, सुख भाांति जीव पायें ॥
ये जन्मोत्सव आदीश्वर, है सुखकारी सुहावना ।
सुस्वागत है अहो… अहो निर्दोश जिन भाासन …
वैराग्य काल आया, संसार ना सुहाया ।
ज्ञायक ही मन को भाया, ज्ञायक ही मन को भाया ॥
अहो दीक्षा का अवसर, निकट आया मन भावना ।
सुस्वागत है अहो… अहो निर्दोश जिन भाासन …
नाशे जो घातिया जिन, प्रगटे चतुश्ट पावन ।
कैवल्य की कला में, जाने त्रैलोक्य भगवन ॥
अहो केवल ज्ञानी जिन, श्री अर्हन परमात्मा ।
सुस्वागत है अहो… अहो निर्दोश जिन भाासन …
नाशे अघातिया रिपु, लोकाग्र में विराजे ।
निश्कर्म अशरीरी, आदर्श है हमारें ॥
सुस्वागत है अहो… अहो निर्दोश जिन भाासन…
सूची
७. गर्भ कल्याणक की भाुभ घड़ी
गर्भ कल्याणक की शुभ घड़ी आई, बधाई हो बधाई वामा माता बधाई…
सोलह सपने अद्भुत देखे, उनके फल राजा से पूछे ।
रानी तेरे गर्भ से सुन्दर पुत्र होगा, तीन लोक का नाथ बनेगा ॥
स्वप्न फलों को सुन माता हर्शाई…
बधाई हो बधाई… गर्भकल्याणक की … बधाई हो
सुरपति की आज्ञा से वाराणसी, स्वर्गपुरी सी सजी हुई ।
रत्नों की वर्शा से धरती, वाराणसी की भरी हुई ।
स्वयं कुबेरजी ने नगरी सजाई
बधाई हो बधाई… गर्भकल्याणक की … बधाई हो
सुरबालायें स्वर्ग से आई, देवीय वस्त्राभूशण लाई ।
रत्नकुक्षी धारिणी वामा माता की, सेवा कर के तृप्ति पाई ॥
तत्त्व चर्चा कर भांका मिटाई
बधाई हो बधाई… गर्भकल्याणक की … बधाई हो
१५. म्हारे आंगन आज आई देखो मंगल
म्हारे आंगन आज आई देखो मंगल घड़ी
म्हारे आंगन आज आई देखो मंगल घड़ी
मंगल घड़ी आई पावन घड़ी हो… मंगल घड़ी आई पावन घड़ी हो
म्हारे आंगन आज आई देखो मंगल घड़ी…
वामादेवी माता जी ललना जायो, तीर्थेश्वर सुत अश्वसेन पायो ।
दुल्हन सी आज लागे देखो वाराणसी - २
म्हारे आंगन आज आई देखो मंगल घड़ी …
अंतिम जन्म लिया प्रभु तुमने… अंतिम जन्म लिया प्रभु तुमने … लिया प्रभु तुमने ।
स्वानुभूति रमणी का वरने, फिर नरकों में पल भर देखों भाांति पड़ी ॥
म्हारे आंगन आज आई देखो मंगल घड़ी …
सुरपति ऐरावत ले आये - सुरपति ऐरावत ले आये ।
भाचि इन्द्राणी मंगल गाये, कलशा सजा ले आये क्षीर नीर भरी ॥
म्हारे आंगन आज आई देखो मंगल घड़ी …
रत्नमयी पलने में झूले - रत्नमयी पलने में झूले ..पलने में झूले देखो पलने में झूले ।
निज वैभव के रत्न न भूले, तीर्थेश्वर नाथ महिमा तुम्हरी जग में बड़ी ।?
म्हारे आंगन आज आई देखो मंगल घड़ी …
रचयिता - डॉ. विवेक जैन, छिंदवाडा
१७. आंनद अंतर मां आज न समाय
आनंद अंतर में आज न समायें आनंद अंतर में आज न समायें
जन्मे. पारस कुमार खुला मुक्ति का द्वार, तिहुलोक में आनंद छाये ॥
आनंद अंतर में आज न समायें …
स्वर्गपुरी से देवगति तज प्रभु ने नरतन पायों ।
धन्य वामादेवी माता, तीर्थंकर सुत जायों ॥ - २
इन्द्र नगरी में आयें मंगल उत्सव रचायें - (२कोरस)
सारी धरती दुल्हन सी सजी जायें …
आनंद अंतर में आज न समायें …
सोलह सपने मां ने देखे, मन में अचरज भारी ।
अश्वसेन से फल जब पूछा, उपजा आनंद भारी ॥ - २
तीन लोकों का नाथ तेरे गर्भ में मात - २ (कोरस)
अनुभूति में दर्शन पायें …
आनंद अंतर में आज न समायें …
अंतिम जन्म लिया प्रभु तुमने सुरपति द्वारे आये ।
नेत्र हजार निहारे प्रतिक्षण, तृप्त नहीं हो पाये ॥ - २
गीत सुरबाला गाये भाचि चौक पुरायें - २ (कोरस)
नरकों में भाांति छायें …
आनंद अंतर में आज न समायें …
भव्यजनों के इश्ट जिनेश्वर, अंतिम भव को धारे ।
स्वयं तिरे भव सागर से और हमको पार उतारे ॥ - २
सब मिलकर के आये, प्रभु दर्शन को पाये - २ (कोरस)
प्रभुता अपनी पा जायें …
आनंद अंतर में आज न समायें …
रचयिता - डॉ. विवेक जैन, छिंदवाडा
४. आयो आयो पंचकल्याणक भविजन
आयो आयो पंचकल्याणक भविजन आ जाओ… आ जाओ
खुला है आज मुक्ति का द्वार भविजन आ जाओं … आ जाओ
आयो पंचकल्याणक आज भविजन आ जाओ… आ जाओ
आनंद है उत्सव… आ जाओ
ये महा महोत्सव … आ जाओ
आओ रे पधारो सिद्वक्षेत्र मंगल यह उत्सव आया यहाँ ।
(कोरस) आयो आयो पंचल्याणक भविजन आ जाओ … आ जाओ सिंगल
(कोरस) खुला है आज मुक्ति का द्वार भविजन आ जाओ … आ जाओ सिंगल
आयो आयो पंचकल्याणक भविजन आ जाओ… आ जाओ
खुला है आज मुक्ति का द्वार भविजन आ जाओं …
क्षेत्र शिखरजी सिद्धधरा का कण कण है अति पावन ।
नगर बनारस आज बन गया भरत क्षेत्र का मधुवन ॥
बहे आनंद रस की धार भविजन आ जाओं … आ जाओ …२
आनंद है उत्सव …
भव्यों का सौभाग्य खिला है जिनदर्शन सब पायें ।
सिद्धक्षेत्र में आकर हम सब सिद्धों से मिल जावें ॥
लागा सिद्धों का दरबार भविजन आ जाओं… आ जाओं …२
आनंद है उत्सव…
रत्नत्रय उर धार स्वयं प्रभु, भााश्वत शिवपद पायें ।
भवोदधि में हम थे अटके हमको पार लगावों ॥
चलो भवसागर के पार भविजन आ जाओं…आ जाओं…२
आनंद है उत्सव…
सिद्धों को मंगल आमंत्रण सिद्धालय से आया ।
अब जो जागों निज हित लागों सिद्धों ने बुलवाया ॥
पाने सिद्धगति सुखकार भविजन आ जाओं…आ जाओं …२
आनंद है उत्सव…
१२. माता थारी परणति
माता थारी परणति तत्त्वमयी… माता थारी परणति तत्त्वमयी,
पायों जिनवचनों ना सार माता संग चर्चा मां…
पायों जिनवचनों ना सार माता संग चर्चा मां…
कोरस :…माता थारी परणति तत्त्वमयी…
माता थारी परणति तत्त्वमयी…
पायों जिनवचनों ना सार माता संग चर्चा मां…
पायों जिनवचनों ना सार माता संग चर्चा मां…
माता थारी परणति तत्त्वमयी…
समय नु सार आतम … समय नु सार आतम.. माता मन भावें…
राग से भिन्न ज्ञायक मात बतलावें ॥
पायी तृप्ति अंतर मां अविकार माता संग चर्चा मां…
पायी तृप्ति अंतर मां अविकार माता संग चर्चा मां…
माता थारी परणति तत्त्वमयी… माता थारी परणति तत्त्वमयी…
पायों जिनवचनों ना सार माता संग चर्चा मां…पायों जिनवचनों ना सार माता संग चर्चा मां…
माता थारी परणति तत्त्वमयी…
भाुद्ध स्वरूपी ज्ञायक…भाुद्ध स्वरूपी ज्ञायक… सहज अनूपा ।
अरूपी अमूर्तिक सदा आंनदरूपा ॥
जाना निज स्वरूप सुखकार माता संग चर्चा मां…
जाना निज स्वरूप सुखकार माता संग चर्चा मां…
माता थारी परणति तत्त्वमयी… माता थारी परणति तत्त्वमयी…
पायों जिनवचनों ना सार माता संग चर्चा मां…पायों जिनवचनों ना सार माता संग चर्चा मां…
माता थारी परणति तत्त्वमयी…
जो न करे कर्म…जो न करे कर्म नोकर्म परिणाम ।
मात्र जाने न करें ज्ञानी आतमराम ॥
पायों दिव्यध्वनि नों सार माता संग चर्चा मां …
पायों दिव्यध्वनि नों सार माता संग चर्चा मां …
माता थारी परणति तत्त्वमयी… माता थारी परणति तत्त्वमयी…
पायों जिनवचनों ना सार माता संग चर्चा मां…पायों जिनवचनों ना सार माता संग चर्चा मां…
माता थारी परणति तत्त्वमयी…
३. आओ नी आओ नी भविजन
आओ नी आओ नी भविजन …आओ नी आओ नी भविजन
सिद्धक्षेत्र के तले, सिद्धप्रभु से मिलें … निज अनुभव रस पान करें ।
आओ नी आओनी भगवन् …
मधुवन की पावन वसुधा से…२
मंगल आमंत्रण आया …२
सिद्धों के संग मिल जाने को…२ भव्यों को है बुलवाया …२
अश्टकर्म के बंधन छूटे…२ भव भव से
निज अनुभव रस पान करें …
मंगलकारी प्रभुकल्याणक …२
भव्यों के कल्याण स्वरूप…२
जिन दर्शन है उनका सच्चा …२ प्रभु सम जो देखे निज रूप …२
चिरभावी तब मोह पलाय…२ पल भर में
निज अनुभव रस पान करें …
यदि दुख से परिमुक्ति चाहो…२
तो श्रामण्य स्वीकार करों …२
इन्द्रिय सुख तो सदा दुखमय…२ अब इनका परिहार करो …२
भव सागर से पार चलो अब…२ क्षण भर में
निज अनुभव रस पान करें…
२१. धन्य घड़ी ये धन्य सुअवसर
धन्य घड़ी वह धन्य सुअवसर प्रभु ने पाया पद निर्वाण ।
धन्य घड़ी वह धन्य सुअवसर प्रभु ने पाया पद निर्वाण…
मोहारि रिपु जयकर प्रभुजी…मोहारि रिपु जयकर प्रभुजी ।
सिद्धालय जा गये विराज ।
धन्य घड़ी वह धन्य सुअवसर…
अनुपमेय अविकारी निश्चल…अनुपमेय अविकारी निश्चल ।
तत्क्षण पाया निज पद राज ॥
धन्य घड़ी वह धन्य सुअवसर…
परम सूक्ष्म सिद्धात्म स्वरूपी… परम सूक्ष्म सिद्धात्म स्वरूपी ।
नित्य निरामय आंनद रूप ॥
धन्य घड़ी वह धन्य सुअवसर…
त्रिभुवन चूड़ामणि नित भाोभित…त्रिभुवन चूड़ामणि नित भाोभित ।
अशरीर निश्काम अनूप ॥
धन्य घड़ी वह धन्य सुअवसर…
हुये जगत आराध्य स्वयं भू…हुये जगत आराघ्य स्वयं भू ।
निज स्वभाव आराधन कर ॥
धन्य घड़ी वह धन्य सुअवसर…
वंदनीय हो गये स्वयं प्रभु … वंदनीय हो गये स्वयं प्रभु ।
निज ध्रुव ज्ञायक वंदन कर ॥
धन्य घड़ी वह धन्य सुअवसर…
१६. वंदनवार सजाओ सखी आज अंगना
वंदनवार…वंदनवार सजाओ सखी आज अंगना ।
वंदनवार सजाओ सखी आज अंगना ॥
आज अंगना जन्में पारस ललना ।
आज अंगना जन्में पारस ललना ॥…
स्वर्ग सी प्यारी लागे सारी नगरियाँ ।
जन्म महोत्सव की बाजत बधैया ॥
आनंद की धार बहें आज अंगना हो…हो आनंद की धार बहें आज अंगना
वंदनवार सजाओ सखी आज अंगना…
समकित के सूत्र गूथों ज्ञान के पुश्प ।
दर्शन से सजा हृदय चारित्र अनूप ॥
हर्श से झूमे भव्यों की भावना हो…हो हर्श से झूमे भव्यों की भावना
वंदनवार सजाओ सखी आज अंगना…
कल्पतरू में लागे पुश्प मनोहर ।
हर्शित है नर नारी अवसर ये सुखकर ।
इन्द्राणी नृत्य करें बाजे कंगना हो …हो इन्द्राणी नृत्य करें बाजे कंगना
वंदनवार सजाओ सखी आज अंगना…
१८. जहॉं राग द्व’’ की गंध नहीं
जहाँ राग द्व’’ की गंध नहीं बस सुख अनुपम ही मिले ।
मुक्ति है नगर सिद्धों का है घर चलो सिद्धों की छांव की तले ॥
जहाँ राग द्व’’ की गंध नहीं बस सुख अनुपम ही मिले ।
मुक्ति है नगर सिद्धों का है घर चलो सिद्धों की छांव की तले ॥
चलो सिद्धों की छांव की तले…
गुण रूपी जहाँ चमके तारे, और चांद हो समकित का ।
अंतर वीणा प्रतिक्षण गाती, आतम के गीत सदा ॥
अंतर वीणा प्रतिक्षण गाती, आतम के गीत सदा ॥
चैतन्यमयी इस उपवन में हम मुक्ति वधू से मिलें
मुक्ति है नगर सिद्धों का है घर चलो सिद्धों की छांव की तले ॥
चलो सिद्धों की छांव की तले…
जहाँ सुख स्वरूपी अंबर पर उड़ती है ज्ञान पंतग ।
ध्रुव दृश्टि से डोर से बंधी हुई अविचल स्थित है उतंग ॥
ध्रुव दृश्टि से डोर से बंधी हुई अविचल स्थित ह उतंग ॥
ये देख नजारे अनुपम से भविजन मन कमल खिले
मुक्ति है नगर सिद्धों का है घर चलो सिद्धों की छांव की तले ॥
चलो सिद्धों की छांव की तले…
जहाँ राग द्व’’ की गंध नहीं बस सुख अनुपम ही मिले ।
मुक्ति है नगर सिद्धों का है घर चलो सिद्धों की छांव की तले ॥
चलो सिद्धों की छांव की तले…चलो सिद्धों की छांव की तले…
चलो सिद्धों की छांव की तले… चलो सिद्धों की छांव की तले…
५. नाथ तुम्हारे दर्शन से निज दर्शन
नाथ तुम्हारे दर्शन से निज दर्शन से निज दर्शन मैनें पाया ।
तुम जैसी प्रभुता निज में लख, चित मेरा हर्शाया ॥…कोरस
नाथ तुम्हारे दर्शन से निज दर्शन से निज दर्शन मैनें पाया ।
तुम जैसी प्रभुता निज में लख, चित मेरा हर्शाया ॥…कोरस
तुम बिन जाने निज से च्युत हो भववन में भटका हूँ ।
निज का वैभव निज में भााश्वत अब मैं समझ सका हूँ ॥
निज प्रभुता में मगन होऊ में होऊ निज की माया ॥
तुम जैसी प्रभुता निज में लख …
पर्यय में पामरता तब भी द्रव्य सुखमयी राजे ।
लक्ष्य तजूं पर्यायों का निज भाव लखूं सुखकाजे ॥
पर्यायों में भटक भटककर मैं बहुं दुख उठाया ॥
तुम जैसी प्रभुता निज में लख …
पद्मासन थिर मुद्रा थिरता का ये पाठ पठाती ।
निजमय भाव लखे ते सुख है, नासादृश्टि सिखलाती ॥
पर पर करने कर्ता रहित, सुखमय शिवपंथ सुहाया ॥
तुम जैसी प्रभुता निज में लख …
यही भावना अब तो भगवन निज में ही रम जाऊँ ।
आदि व्याधि उपाधि रहित मैं परम समाधि पाऊँ ॥
ज्ञानानंद ध्रुव स्वभाव ही अब मेरे मन भाया ॥
तुम जैसी प्रभुता निज में लख …
नाथ तुम्हारे दर्शन से निज दर्शन से निज दर्शन मैनें पाया ।
तुम जैसी प्रभुता निज में लख, चित मेरा हर्शाया ॥…कोरस में
नाथ तुम्हारे दर्शन से निज दर्शन से निज दर्शन मैनें पाया ।
तुम जैसी प्रभुता निज में लख, चित मेरा हर्शाया ॥…कोरस में
१३. म्हारा पंच प्रभो नो मार्ग
म्हारा पंचप्रभु भगवान सुहावनो रे …म्हारा पंचप्रभु
थारी वीतराग जिनमुद्रा मन भावनो रे… थारी वीतराग जिन
म्हारा पंचप्रभु भगवान सुहावनो रे … (कोरस)
म्हारा पंचप्रभु भगवान सुहावनो रे … (कोरस)
म्हारा अरिहंत प्रभुवर प्यारा, जग को मुक्ति मार्ग दिखलावें ।… २
प्रभु की सौम्य छवि मनभावन, हम को वस्तुस्वरूप दिखावें ॥…२
प्रभु ने रत्नत्रय प्रगटायो… सुखकारनों रे…प्रभु ने..
सर्वकर्मो से विरहित प्रभुवर भाश्वत सिद्ध परमपद पायो ।… २
अविनाशी अविचल सुखरूपी, भव्यों के आदर्श सदा हो ॥… २
भोगें सुख अनंतानंत आंनदकारनो रे …भोगें सुख… ओम…ओम…ओम…
साधु संघ के अनुशासक आचारज विज्ञानी ध्यानी ।
निर्मल आचारज के धारी जो मुनिवर पथ के है अनुगामी ॥
पंचाचार धारी मुनिवर… हितकारनों रे …पंचाचार धारीकृ
श्रुत आगम के बहु अभ्यासी, स्वयं पढें है और पढावें ।
ज्ञानादिक स्वभाव आराधक, ध्रुव ज्ञायक के गीत सुनावें ॥
विशयों की न चाह जिनके मंगलकारनों रे …विशयों की… ओम…ओम…ओम…
मुनिवर सकलव्रती बडभागी, भव भोगों से सदा विरागी ।
चलते फिरते सिद्धों सम मुनि परणति अनुभव रस नित पागी ॥
बहती उपशम रस की धारा… सुखकारनों रे …बहती उपशम
म्हारा पंचप्रभु भगवान सुहावनो रे …म्हारा पंचप्रभु
थारी वीतराग जिनमुद्रा मन भावनो रे… थारी वीतराग जिन
म्हारा पंचप्रभु भगवान सुहावनो रे
म्हारा पंचप्रभु भगवान सुहावनो रे
१४. माता वामा जायो प्यारा प्यारा ललना
माता वामा…माता वामा जायो प्यारा प्यारा ललना ।
अंतिम भवधारी झूले पलना
माता वामा…माता वामा जायो प्यारा प्यारा ललना ।
अंतिम भवधारी झूले पलना
झूले पलना देखो पारस ललना, झूले पलना देखो पारस ललना ।
तीन तीन ज्ञानधारी भाोभे ललना, परणति प्रभुवर की क्या कहना ॥
माता वामा जायो प्यारा प्यारा ललना, अंतिम
दश दिश फैली खुशियॉं बाजे भाहनाई रे, अश्वसेन नृप द्वार, बाजत बधाई रे ।
दश दिश फैली खुशियॉं बाजे भाहनाई रे, अश्वसेन नृप द्वार, बाजत बधाई रे ।
हिल मिल..हिल मिल नृत्य करें सारी सखियां ।
जन्म महोत्सव की भाुभ घड़ियॉं ॥
सुरपति उत्सव कीना अद्भुत नजारा है, त्रिभुवन की भाोभा न्यारी होवें जयकारा है ।
सुरपति उत्सव कीना अद्भुत नजारा है, त्रिभुवन की भाोभा न्यारी होवें जयकारा है ।
भावना के… भावना के रंग सजी सारी नगरियॉं ।
आनंद रस की छलके है गागरियॉं ॥
रत्नत्रय भाोभित, प्रभुजी सुहावना, जिनशासन की होगी मंगल प्रभावना ।
रत्नत्रय भाोभित, प्रभुजी सुहावना, जिनशासन की होगी मंगल प्रभावना ।
ज्ञानस्वभावी…ज्ञानस्वभावी आतम मेरे मन भा गया ।
निज कल्याण का अवसर आ गया ॥
२९. गाजती बाजती आई प्रतिश्ठा आंगड
गाजती बाजती आई प्रतिश्ठा आंगड में आज हमार रे… आया पंचकल्याणक
गाजती बाजती आई प्रतिश्ठा आंगड में आज हमार रे… आया पंचकल्याणक (कोरस)
मंगल महोत्सव पार्श्वकुंवर का हर्शित है वसुधा अपार रे…आया पंचकल्याणक
मंगल महोत्सव पार्श्वकुंवर का हर्शित है वसुधा अपार रे…आया पंचकल्याणक (कोरस)
अंतिम भवधारी प्रभुजी पधारे अभिंनदन करे भविजन सारे ।
अंतिम भवधारी प्रभुजी पधारे अभिंनदन करे भविजन सारे । (कोरस)
अंतिम भवधारी प्रभुजी पधारे अभिंनदन करे भविजन सारे … हे जी रे हे
समकित गुलाल से रंग गई वसुधा हो रही प्रभु जयकार रे
मंगल महोत्सव पार्श्वकुंवर का हर्शित है वसुधा अपार रे…आया पंचकल्याणक
फास्ट बीट के साथ …
गाजती बाजती आई प्रतिश्ठा आंगड में आज हमार रे… आया पंचकल्याणक
गाजती बाजती आई प्रतिश्ठा आंगड में आज हमार रे… आया पंचकल्याणक (कोरस)
मंगल महोत्सव पार्श्वकुंवर का हर्शित है वसुधा अपार रे…आया पंचकल्याणक
मंगल महोत्सव पार्श्वकुंवर का हर्शित है वसुधा अपार रे…आया पंचकल्याणक (कोरस)
३०. माता वामा ललना जायो, तीर्थंकर सुत अंगना आयो ।
माता वामा ललना जायो, तीर्थंकर सुत अंगना आयो ।
यहाँ जन्मे है पारसकुमार जी हो…हो…हो यहाँ जन्मे है पारसकुमार जी
माता वामा ललना जायो, तीर्थंकर सुत अंगना आयो ।
यहाँ जन्मे है पारसकुमार जी हो…हो…हो यहाँ जन्मे है पारसकुमार जी
अंतर के आनंद में ललना झूले रे … झूले रे
अंतर के आनंद में ललना झूले रे … झूले रे
भेद ज्ञान के फुलवा फूले रे … फूले रे
भेद ज्ञान के फुलवा फूले रे हो …हो
श्रद्धा भक्ति के हार सजाओं सखियाँ हाँ सजाओ सखियाँ
श्रद्धा भक्ति के हार सजाओं सखियाँ…
परणति अपनी भाुद्ध बनाओ, आनंद अवसर मंगल आयो ।
आज जन्मे है पारस कुमार रे
३१. बाजत बधाई अश्वसेन की नगरियॉं …
बाजत बधाई अश्वसेन की नगरियाँ …बाजत बधाई अश्वसेन की नगरियाँ ।
आनंद के अमृत की छलकी गगरियाँ आनंद के अमृत की छलकी गगरियाँ ॥
माँ वामा जायो पार्श्वकुमार बधाई मिल गाओ
मिल गाओ सखी मिल गाओ रे सखी मिल गाओ रे मिल गाओ
स्वर्गपुरी से प्रभुजी पधारे… स्वर्गपुरी से प्रभुजी पधारे ।
रत्नों की वर्शा कर इन्द्र हर्शाये,… रत्नों की वर्शा कर इन्द्र हर्शाये ॥
भाोभा नगरी..भाोभा नगरी की अगम अपार …बधाई मिल गाओ
मिल गाओ सखी मिल गाओ रे सखी मिल गाओ रे मिल गाओ
बाजत बधाई अश्वसेन की नगरियाँ …
३२. बहती आनंद की धार, भव्यों के मनहार
बहती आनंद की धार, भव्यों के मनहार …आये पारसकुमार
कुमार रे कुमार आये पारसकुमार… कुमार रे कुमार आये पारसकुमार
बाजे दुंदभी ताल, उड़े केशर गुलाल … आये पारसकुमार
कुमार रे कुमार आये पारसकुमार… कुमार रे कुमार आये पारसकुमार
पावन हो गई वसुधा पारस के नाम से … हो …हो
कण कण हर्शित होकर करे जयगान रे … हो … हो
पुलकित परणति नृत्य कर रही गावें मंगलाचार ।
बहती आनंद की धार, भव्यों के मनहार … आये पारसकुमार
३३. निज कल्याण के हेतु कल्याणक मंगलमय सुखकार रे ।
निज कल्याण के हेतु कल्याणक मंगलमय सुखकार रे ।
निज प्रभुता को जान स्वयं जिय होता भव से पार रे ॥
होता भव से पार रे …
प्रभु दर्शन का भाव समझना निज दर्शन का ये हेतु ।
जो प्रभु सम निज रूप निरखते उनको मुक्ति का सेतु ॥
हे गाओ रे आज मंगलकार रे जय जय प्रभु की जय जय
मुक्ति का मिला अब मार्ग … चालो रे
हे गाओ रे आज मंगलकार रे जय जय प्रभु की जय जय
मुक्ति का मिला अब मार्ग … चालो रे
२०. ये महामहोत्सव मंगलमय सुहावना
ये महामहोत्सव मंगलमय सुहावना…२
निर्दोश जिनशासन की हो प्रभावना …२
अद्भुत स्वप्न सोलह माता ने देखे, आनंदकारी फल नृप उल्लेखे ।
अंतिम भवधारी सुत गर्भ में आया, पुण्यफला नाथ त्रिभुवन ने पाया ॥
ये गर्भ कल्याणक अतिपावन मनभावना…
प्रभु जनम की मंगल घड़ी आई, तिंहुलोक छाई खुशियाँ बाजे भाहनाई ।
निरखत छवि प्रभु इन्द्र हर्शाये, पांडुकशिला पर मंगल न्हवन रचाये ॥
अंतर आनंद में झूल रहे प्रभु पालना…
उपशम रस धारा प्रभु मनमांहि, विशयन में मन रीझत नांहि ।
प्रभुजी वेश दिगम्बर धारें, राग से भिन्न निज ज्ञायक निहारें ॥
वैराग्य जननी भाये प्रभु वर भावना…
समवशरण भोोभित श्री जिनराया, वस्तु स्वरूप प्रभु वाणी में आया ।
लोकालोक झलके प्रभु ज्ञान मांहि, निजरस लीन भोगें आनंद सदाहि ॥
भााश्वत पद तुम सम प्रगटाऊँ है कामना…
अशरीरी सिद्ध दशा क्षण में प्रगटाई, भव्यों के आदर्श सिद्ध जिनराई ।
ज्ञायक स्वभाव भव्य तुम सम निहारे, निजस्वरूप भव्य तुम सम निहारे ॥
न रहे कामना अब कोई यह कामना …
२२. मंगल ये अवसर आंगण आयो
मंगल ये अवसर आंगण आयो जी, प्रभुजी आयेगें हमारी नगरी …२
भावों की चुनर ओढ आई भाची, सौधर्म आये बडौदा नगरी …२
हर्शित है वसुधा सारी खुशियॉ अपार है ।
भक्ति में झूम रहा इन्द्र परिवार है ।
सुरपति उत्सव कीना, भाचि गीत गाये ।
मंगलकारी प्रभु महोत्सव मनायें …
श्रद्धा सुमनों से सजी गई सिद्धपुरी…
प्रभुजी आयेगें हमारी नगरी … (कोरस)
रोम रोम हर्शे है प्रभु आगमन से
पुश्प रतन वर्शा सुरपति करते ।
भक्ति के रंग डूबे देखो नर नार है ।
गूंज उठा नभ सारा प्रभु जयकार से …
आनंद अमृत की छलक रही गगरी
प्रभुजी आयेगें हमारी नगरी … (कोरस)
आत्मीय आमंत्रण मधुवन से आया ।
भावी सिद्धों को सिद्ध प्रभु ने बुलाया ॥
निज प्रभुता को लख प्रभु बन जाओ ।
तज मोह निद्रा चेतन अब जाग जाओ ॥
पुण्यों के फल में पाई भाुभ ये घड़ी …
प्रभुजी आयेगें हमारी नगरी … (कोरस)
रचयिता - डॉ. विवेक जैन, छिंदवाडा
मूल दस्तावेज़ (PDF): Madhuban_evam_Udaipur_Geet_Dr_Vivek_Jain.pdf (०.२ MB)
स्रोत: Jain Granth E Library (Telegram), t.me/jainegranth/52637।
खोज: मधुबन एवं उदयपुर गीत (डॉ. विवेक जैन, छिंदवाडा), मधुबन एवं उदयपुर गीत (डॉ. विवेक जैन, छिंदवाड़ा), Madhuban evam Udaipur Git