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ये बोल रिकॉर्डिंग से मशीन द्वारा लिखे गए हैं, इनमें अशुद्धियाँ हो सकती हैं।
बीती घड़ियां जीवन की, खबर नहीं है पल छिन की।
जग में लाखों आते हैं,
करनी का फल पाते हैं।
रीत यही है करमन की,
खबर नहीं है पल छिन की।।1।।
धन बल रूप का मान करे,
नश्वर तन अभिमान करे।
बलिहारी तप बल मद की,
खबर नहीं है पल छिन की।।2।।
मीठे बोल ना बोल सका,
समता रस ना घोल सका।
बलिहारी चंचल मन की,
खबर नहीं है पल छिन की।।3।।
जो भी देखा ललचाया,
मन बस में ना कर पाया।
चाहे बड़ी है विषयिन की,
खबर नहीं है पल छिन की।।4।।
आतम अनुभव ना जाना,
फिरे पुजारी दीवाना।
भटके गलियां भव बन की,
खबर नहीं है पल छिन की।।5।।
रचयिता : श्री पुजारी जी
स्वर : पण्डित श्री मांगीलाल जी, कोलारस
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स्रोत: JinSwara ऑडियो संग्रह।
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