परमाथ पंथ सदा पकरौ | Parmath Panth Sada Pakro

परमाथ पंथ सदा पकरौ

परमाथ पंथ सदा पकरौ

कै अरचा परमेश्वरजीकी, कै चरचा गुन चित्त धरौ॥परमारथ. ॥१॥

जप तप संजम दान छिमा करि, परधन परतिय देख डरौ॥परमारथ.॥२॥

‘द्यानत’ ज्ञान यही है चोखा, ध्यानसुधामृत पान करौ॥परमारथ.॥३॥


Artist: पं. द्यानतराय जी
स्रोत: आध्यात्मिक भजन संग्रह (सं. श्री सौभाग्यमल जैन, पं. टोडरमल स्मारक ट्रस्ट, जयपुर, २००६), भजन १०२

अर्थ

हे भव्यप्राणी! अपना कल्याण करने के लिए इस परम लाभकारी मार्ग पर चलो, आरोहण करो।

या तो तुम प्रभु की पूजा करो या हृदय से उनके गुणों की चर्चा करो, उनके गुणों का विचार करते रहो।

जीवन में जप, तप, संयम, दान, क्षमा आदि धारण करो। दूसरे के धन व दूसरे की स्त्री को देखकर, भय के कारण उनसे दूर रहो।

द्यानतराय कहते हैं कि यह ज्ञान ही अच्छा है। सदा ध्यानरूपी अमृत का पान करो।

स्रोत: द्यानत भजन सौरभ, पद 249।

:paperclip: मूल पृष्ठ (छवि):

प्रूफरीडिंग बाकी है