मुझे चरणों से लगा ले, हे नाथ मधुवन वाले ।
मेरी साँस-2 में तेरा, है नाम मधुवन वाले ॥टेक ॥
भक्तों की विपदा प्रभुवर, तुमने है टाली।
मेरी भी बाँहें थामो, हे जगतारी ॥
मेरी बिगड़ी बनाई तूने, हर काम मधुवन वाले ॥1 ॥
पतझड़ है मेरा जीवन, बन के बहार आजा।
सुनकर पुकार प्रभु, बस एक बार आजा॥
वीरान मन के तुम्हीं हो, बहार मधुवन वाले ॥2॥
तुम हो दया के सागर, जन्मों का मैं हूँ प्यासा ।
चरणों में दे दो जगह, बस तुम ज़रा सी ॥
मेरी सुबह-सुबह तुम्हीं हो, हर शाम मधुवन वाले ॥3 ॥
स्रोत: मङ्गल भक्ति सुमन (२०१५), पृष्ठ १७४