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ये बोल रिकॉर्डिंग से मशीन द्वारा लिखे गए हैं, इनमें अशुद्धियाँ हो सकती हैं।
भला कोई या विध मन को लगावो।
जाके लगावत शिव सुख पावो।।
जैसे नटनी चढ़त बरत पर, चहुँ दिस ढोल बजावे।
नाचत गावत लोग रिझावे, तो सूरत बरत पै लगावे।।1।।
जैसे पనरिया सिर पे गगरिया, गगर ढुलन नहिं पावे।
चितवत जात करत बहु बातें, तो सूरत गगर पै लगावे।।2।।
जैसे पतंगा दीप सिखा पर, झपट दिवल पर जावे।
जगमग जोत देख दीपक की, तो बाही में प्रान गमावे।।3।।
ये विध धरम कहो जिनवर ने, मन बच तन कर ध्यावे।
दास भवानी दोउ कर जोरे, तो बोही शिव पद पावे।।4।।
रचयिता : कविवर भवानीदास जी
स्वर : पण्डित श्री मांगीलाल जी, कोलारस
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स्रोत: JinSwara ऑडियो संग्रह।