मंगलमय है जिनवाणी, आनंदमय है जिनवाणी | Mamgalamay Hai Jinavani Anamdamay Hai Jinavani

तर्ज-हूँ स्वतंत्र निश्चल…

मंगलमय है जिनवाणी, आनंदमय है जिनवाणी।
नित्य बोधिनी जिनवाणी, जग कल्याणी जिनवाणी।।1।।

साँची माता जिनवाणी, संकट त्राता जिनवाणी।
सब सुख दाता जिनवाणी, मोक्ष प्रदाता जिनवाणी।।2।।

मोह भगावे जिनवाणी, ज्ञान जगावे जिनवाणी।
काम नशावे जिनवाणी, वैराग्य बढ़ावे जिनवाणी।।3।।

निजानंद रस बरसानी, निज निधि निज में ही जानी।
कोई नहीं जिसकी सानी, सहज नमूँ माँ जिनवाणी।।4।।


स्रोत: भक्ति-भावना (द्वितीय खण्ड)
Artist: श्री ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’
स्रोत: डॉ. विनोद ‘चिन्मय’
स्रोत: जिन-भक्ति सिंधु, पृष्ठ १६८ से १६९
स्रोत: मङ्गल भक्ति सुमन (२०२४), पृष्ठ ६४