भाई काया तेरी दुखकी ढेरी, बिखरत सोच कहा है | Bhai Kaya Teri Dukhki Dheri, Bikharat Soch Kaha Hai

भाई काया तेरी दुखकी ढेरी, बिखरत सोच कहा है

भाई काया तेरी दुखकी ढेरी, बिखरत सोच कहा है।
तेरे पास सासतौ तेरो, ज्ञानशरीर महा है॥भाई ॥

ज्यों जल अति शीतल ह्वै काचौ, भाजन दाह दहा है।
त्यों ज्ञानी सुखशान्त कालका, दुख समभाव सहा है॥भाई. ॥१॥

बोदे उतरैं नये पहिरतैं, कौंने खेद गहा है।
जप तप फल परलोक लहैं जे, मरकै वीर कहा है॥भाई. ॥२॥

‘द्यानत’ अन्तसमाधि चहैं मुनि, भागौं दाव लहा है।
बहु तज मरण जनम दुख पावक, सुमरन धार बहा है॥भाई. ॥३॥


Artist: पं. द्यानतराय जी
स्रोत: आध्यात्मिक भजन संग्रह (सं. श्री सौभाग्यमल जैन, पं. टोडरमल स्मारक ट्रस्ट, जयपुर, २००६), भजन १०६