महावीर-महावीर-महावीर हो, वर्द्धमान-सन्मति-अतिवीर हो | mahavira mahavira mahavira ho varddhamana sanmati ativira ho

तर्जः रंग मा रंग मा…

महावीर-महावीर-महावीर हो, वर्द्धमान-सन्मति-अतिवीर हो।। टेक।।

दोष अठारह रहित हो स्वामी, परम ब्रह्ममय त्रिभुवन नामी ।
अनन्त चतुष्टय गुणधारी हो।। 1।।

अद्भुत समवशरण प्रभु राजे, अन्तरीक्ष जिनराज विराजे।
दिव्यध्वनि अति गम्भीर हो।। 2।।

नवतत्त्वों का स्वांग दिखाया, दिव्य तत्त्व शुद्धात्म बताया।
ध्यावे सो लहे भवतीर हो।। 3।।

आप न जग के कर्त्ता-हर्त्ता, सहज रूप से दृष्टा-ज्ञाता।
तदपि हरो प्रभु भवपीर हो।। 4।।

हे जग नायक ! शीस नवाऊँ, निज प्रभुता निज में प्रगटाऊँ।
कर्मजयी होऊँ महावीर हो।। 5।।


स्रोत: जिन भक्ति सिंधु, पृष्ठ ११८
Artist: ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’