पर्व अठाई आया है | Parv Athai aaya hai

अष्टाह्निका महापर्व पर
श्रद्धेय बा. ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’

पर्व अठाई आया है, आनन्द आनन्द छाया है।
नन्दीश्वर का करें स्मरण, भक्ति भाव उमगाया है ॥ टेक ॥

श्री जिनवर की पूजन करके, निज परिणाम विशुद्ध करें।
नित अभ्यासें श्री जिनवाणी, स्व-पर भेद-विज्ञान करें ॥
मंगल अवसर आया है, आनंद आनंद छाया है ॥ 1 ॥

निज अकृत्रिम भाव निहारें, सम्यक् दर्शन प्रगट करें।
भायें अविरल ज्ञान भावना, सम्यक् चारित्र प्रगट करें ।।
उत्तम अवसर आया है, आनंद आनंद छाया है ॥ 2 ॥

पर द्रव्यों का दोष न देखें, मिथ्या पर की आस तजें।
ज्ञानानन्द स्वभावी प्रभु है, अपना आतम आप भजें ॥
साँचा शरणा पाया है, आनंद आनंद छाया है ॥ 3 ॥

चिन्ताओं का कर निरोध अब, निज में ही एकाग्र रहें।
अहो ! यही निर्ग्रन्थ मार्ग है, हो नि:शंक हम बढ़े चलें ॥
धनि निजरूप सुहाया है, चरणों शीश नवाया है ॥ 4 ॥