च-वर्ग (च छ ज झ)
कुल 375 भजन
च (65)
- चंद क्षण जीवन के तेरे रह गए
- चन्द्रानन जिन चन्द्रनाथके, चरन चतुर-चित ध्यावतु हैं
- चन्द्रोज्वल अविकार स्वामी जी
- चरखा चलता नाँहि
- चरणों में आ पड़ा हूँ
- चरणों में आया हूँ
- चरणों में आये हैं, माँ
- चरणों में प्रभुवर के आयेंगे हम
- चरणों में बाहुबली के, मैं सविनय शीस नवाऊँ
- चलता चल
- चलि सखि देखन नाभिरायघर, नाचत हरि नटवा
- चलो चलें मंदिर में दर्शन
- चलो चलें सम्मेदशिखर, करें वंदना आनंदकर
- चलो चलो मंदिर में दर्शन करेगें
- चलो रे भाई अपने वतन में
- चलो रे भाई मोक्षपुरी (कवि राजमल पवैया)
- चलो रे भाई सिद्धपुरी (कवि राजमल पवैया)
- चलो सब मिल सिधगिरी
- चवलेश्वर पारसनाथ
- चादर हो गई बहुत पुरानी
- चारित्र भक्ति
- चाह मुझे है दर्शन की
- चाहे धूप रहे या छाया, चित्स्वरूप अनुभव में आया
- चिकने घड़े हम चिकने
- चित चिंतकैं चिदेश
- चित्त! चेतनकी यह विरियां रे
- चित्स्वरूप दर्शायो स्वामिन् ! चित्स्वरूप दर्शायो
- चित्स्वरूप महावीर, तुम्हीं ने दरशाया
- चिदरायगुन सुनो मुनो प्रशस्त गुरुगिरा
- चिदानंद चैतन्य प्रभु का
- चिदानन्द चिद्रूप अहो
- चिदानन्द स्वामी, चिदानन्द स्वामी
- चिद्रूप हूँ, चिद्रूप हूँ, मैं चिदानन्द चिद्रूप हूँ
- चिन्ता चाहे जितनी कर लो, नहीं सार निकलने वाला है
- चिन्मात्र स्वरूपं आनन्द रूपं समयसार अविकार रे
- चिन्मात्र स्वरूपो5हं
- चिन्मूरत दृगधारी
- चिन्मूरत दृग्धारी की मोहे
- चिर संचित अरमानों का
- चेतन अपनो रूप निहारो
- चेतन अब तो निज घर आओ
- चेतन ! अब तो मोह को छोड़ो
- चेतन अब धरि सहजसमाधि, जातैं यह विनशै भव ब्याधि
- चेतन उलटी चाल चले
- चेतन कौन अनीति गही रे
- चेतन ! खेल सुमति संग होरी
- चेतन खेलै होरी
- चेतन जाग, तुझे ध्रुवराज बुलाते हैं
- चेतन जो अगर चाहते हो शांति
- चेतन तू तिहुँकाल अकेला
- चेतन तू तिहुंकाल अकेला
- चेतन तें यों ही भ्रम ठान्यो I Chetan Tain Yon Hi
- चेतन निज भ्रमतें भ्रमत रहै
- चेतन प्रभु के गुण गा ले, निज दर्शन निज में पा ले
- चेतन यह बुधि कौन सयानी, कही सुगुरु हित सीख न मानी
- चेतन स्वयं बनो भगवान, नैक जल्दी निर्णय कीजो
- चेतन है तू
- चेतना लक्षणं आनंद कंदनं - गीत
- चेतो चेतन निज में
- चैतन्य के दर्पण में
- चैतन्यनाथ जय जय चैतन्यनाथ
- चैतन्यनाथ सु जयवन्त वर्ते
- ( चौपाई )
- चौबीस भगवान् स्तुति
- चौबीसौं को वंदना हमारी
छ (10)
- छांडत क्यौं नहिं रे
- छांडि दे या बुधि भोरी, वृथा तनसे रति जोरी
- छायो आनंद छायो रे
- छोटा सा मंदिर बनायेंगे
- छोटा सा मन्दिर बनायेंगे
- छोटी-2 बइयाँ
- छोटे-छोटे मुनिवर
- छोटे-छोटे मुनिवर, हो गये निहाल
- छोड़ा सब जग का क्लेश
- छोड़ो-छोड़ो रे विषय-कषाय आलस को
ज (295)
- जंगल में मुनिराज अहो
- जग में जीवन थोरा, रे अज्ञानी जागि
- जग में श्रद्धानी जीव ‘जीवन मुकत’ हैंगे
- जग में सन्त चरण सुखकार
- जगत जन जूवा हारि चले
- जगत में सो देवन को देव
- जगत में होनहार सो होवै, सुर नृप नाहिं मिटावै
- जगतमें सम्यक उत्तम भाई
- जगदानंदन जिन अभिनंदन, पदअरविंद नमूं मैं तेरे
- जन-जन को अचरज आयो
- जन्म कल्याणक आज-वीर
- जन्म कल्याणक गीत
- जन्म जयंती महावीर की, मंगल जय जयकार करें
- जन्म लिया है महावीर ने
- जन्म सफल कर लो भवि प्राणी, अपना जन्म सफल कर लो
- जन्मदिन किसका रे भाई!
- जन्मे महावीर भगवान, छाया जग में हर्ष महान
- जन्मे हैं ऋषभ कुमार कि मंगल
- जप जप रे नवकार मंत्र
- जप लो रे आदीश्वर नाम
- जपि माला जिनवर नाम की
- जपि माला जिनवर नामकी
- जपूँ मैं जिनवर-जिनवर
- जब एक रतन अनमोल है
- जब चले आत्माराम
- जब जन्मे तीर्थंकर, तब सारी
- जब तेरी डोली निकाली जाएगी, बिन मुहूरत के उठा ली जाएगी
- जब निज आतम अनुभव आवै जब निज
- जब मुनिवर आते हैं
- जब से प्रीति लगी, ज्ञान ज्योति जगी, जिनवर प्यारा
- जब से मैंने आतम
- जब हि सुनी हम श्री जिनवाणी, आनंद उर न समाया है
- जबतैं आनंदजननि दृष्टि परी माई
- जम आन अचानक दाबैगा
- जय अरिहन्ता तुम्हीं महान्
- जय आदीश्वर-जय आदीश्वर, भाव सहित स्तवन करूँ
- जय कुन्द कुन्द जी थाँकी
- जय जय आदीश्वर भगवान, दर्शन आनन्दमय अम्लान
- जय जय जग-भरम-तिमिर, हरन जिन धुनि
- जय जय जय जिनवर, अंतर्दृष्टि तुम सम
- जय जय जिनवर जय जय जिनवर
- जय जय मुनिवर तुम
- जय जय वीतराग सर्वज्ञ हितंकर
- जय जय सिद्ध भगवान् आदर्श मेरे
- जय जिन वासुपूज्य शिव-रमनी-रमन मदन-दनु-दारन हैं
- जय जिनवाणी, जय शुद्धातम
- जय जिनवाणी माँ, जय जिनवाणी माँ
- जय जिनवाणी माता, भक्ति में चित्त पागे
- जय जिनशासन सुखकार रे
- जय जिनेन्द्र बोलिए
- जय नेमिनाथ-जय नेमिनाथ,दर्शन पाकर हुआ सनाथ
- जय नेमीश्वर-जय नेमीश्वर, जय नेमीश्वर स्वामी
- जय परमेश्वर अविकारी
- जय पारस-जय पारस, जय-जय पारसनाथ जी
- जय बाहुबली- जय बाहुबली, जय बाहुबली- जय आत्मबली
- जय बोलो त्रिशला के वीर की
- जय बोलो पारसस्वामी की जय बोलो त्रिभुवननामी की
- जय बोलो बाहुबली स्वामी की, जय-जय बोलो
- जय बोलो सम्यक् दर्शन की (कवि राजमल पवैया)
- जय महावीर-जय महावीर, जय अतिवीर-जय अतिवीर
- जय महावीर-जय महावीर, जय-जय बोलो श्री महावीर
- जय शिव-कामिनि-कन्त वीर, भगवन्त अनन्तसुखाकर हैं
- जय श्री आदि जिन
- जय श्री ऋषभ जिनंदा! नाश तौ करो स्वामी मेरे दुखदंदा
- जय श्री वीरजिन वीरजिन वीरजिनचंद
- जय श्रीवीर जिनेन्द्रचन्द्र, शतइन्द्रवंद्य जगतारं
- जय हो जय हो परम जिनराज
- जय-जय कुन्दकुन्द भगवान, नशाया अंतर का अज्ञान
- जय-जय चन्द्र जिनेश, दर्शन मंगलकारी रे
- जय-जय चन्द्रप्रभो भगवान, आनन्दामृत चन्द्र महान
- जय-जय जिनदेव शास्त्र सुगुरु महान
- जय-जय नेमीश्वर भगवान, करूँ मैं परम भक्ति अम्लान
- जय-जय बोलो, जय-जय बोलो
- जय-जय महावीर भगवान, दर्शन कर आनन्द भया
- जय-जय मुनिवर विष्णुकुमार
- जय-जय मुनिवर विष्णुकुमार, गुरुवर धर्म के जाननहार
- जय-जय हो प्रभु, जय-जय हो प्रभु
- जय-जय-जय निर्ग्रन्थ ऋषिराज
- जय-जिनवाणी, जय-जिनवाणी, जय-जिनवाणी माता
- जयति जिनवर जयति जिनवर
- जयवंतो जिनबिम्ब
- जयवंतो जिनवाणी
- जयवंतो नित जैनधर्म, यथायोग्य व्यवहार धर्म
- जयवंतो भगवंत जगत में, जयवंतो भगवंत रे
- जयवन्तो गुरुदेव हृदय में जयवन्तो
- जयवन्तो जिनराज, जयवन्तो जिनराज
- जयवन्तो ज्ञायक रूप, जयवन्तो शुद्ध चिद्रूप
- जयवन्तो नित जिनशासन
- जयवन्तो निर्ग्रन्थ साधु सुखकार हैं, दर्श मंगलकार हैं
- जयवन्तो नेमिनाथ, जयवन्तो नेमिनाथ
- जयवन्तो प्रभु वीर हमारे, जयवन्तो प्रभु वीर
- जयवन्तो मेरी जिनवाणी माँ
- जरा सी सम्पदा पाकर, अरे ! मदहोश मत होना
- जल भरि-भरि लाओ..
- जहाँ केश लुंचन, हाथ कमण्डल
- जहाँ महावीर ने जन्म लिया
- जहाँ राग-द्वेष की गंध नहीं
- जहाँ रागद्वेष से रहित निराकुल
- जाऊँ कहाँ तज शरन तिहारे
- जागा है पुण्य महान, प्रभुवर भक्ति करूँ
- जागृति गीत
- जागो चेतन, तुम्हें जगाने को
- जागो जी माता
- जागो-जागो, आलस त्यागो, करो आत्म कल्याण रे
- जान के सुज्ञानी जैनवानी की सरधा लाइये
- जानत क्यों नहिं रे
- जाननहार को जान, फँसो मत
- जाननहार ही सहज जनावे
- जाना मैंने ज्ञान से
- जानूँ जाननहार सहज ही, जाननहार ज्ञायक हूँ
- जानूँ मैं जाननहार रे
- जानो-जानो रे रतन को मोल, फैंको ना हीरा कंकरन में
- जानो-जानो-जानो, जाननहार को जानो
- जितना देखेगा बाहर में, उतना होगा हैरान ही तू
- जिन गुण गाओ हर्षाओ
- जिन चरणों में अब लगी लगन, प्रभु चरणों में अब लगी लगन
- जिन छवि तेरी यह, धन जगतारन
- जिन छवि लखत यह बुधि भयी
- जिन दर्शन (ऐसा ही प्रभु)
- जिन दर्शन की महिमा स्तुति
- जिन देख मगन भयो मेरो मनवा
- जिन नाम सुमर मन ! बावरे
- जिन बैन सुनत मोरी
- जिन राग द्वेष त्यागा
- जिन रूप मंगलमय अहो
- जिन शासन बड़ा निराला
- जिन स्तुति- निज के आनंद की तो बात कुछ विचित्र है
- जिन स्वपरहिताहित चीन्हा
- जिनके हिरदै प्रभु नाम नहीं
- जिनके हृदय जिनराज बसे, उनको भय कैसे हो
- जिनको जिनधर्म सुहाया
- जिनतीर्थ नाथ जग में जयवन्त वर्ते
- जिनदर्शन सुखकार, जय जयकार
- जिनदीक्षा लेके जंगल में जाऊँ जिनराज
- जिनधर्म का झंडा केशरिया
- जिनधर्म के हम हैं अनुयायी, जिनधर्म की शान बढ़ायेंगे
- जिनधर्म से है प्रेम तो बस भावना ये भाईये
- जिनधर्म हमको लागे प्यारा
- जिनधर्म हमको है प्राणों से प्यारा
- जिनपद चाहै नाहीं कोय
- जिन-प्रतिबिम्बका माहात्म्य - पं० बनारसीदास जी
- जिनप्रतिमा जिनवर सी कहिए
- जिनभक्ति अमृतमयी, सब दुःख दूर करे
- जिनमंदिर आते सुखकारी है
- जिनमंदिर का शिलान्यास
- जिनमंदिर में, आओ रे आओ
- जिनमंदिर में आओ-आओ, भविजन मिलकर आओ
- जिनमंदिर में धर्म महोत्सव
- जिनमंदिर में धर्म महोत्सव, गूँजे जय-जयकार रे
- जिनमंदिर है जग में अशरण-शरण
- जिनमंदिर है हमको मंगल शरण
- जिनमंदिर-जिनमंदिर आना सभी
- जिनमुद्रा से झरे परम रस, आनन्द उर न समाय रे
- जिनमुद्रा हमको लागे प्यारी
- जिनराज चरन मन मति बिसरै
- जिनराज… जिनराज
- जिनराज तुम्हारी मूरत की
- जिनराज तेरी महिमा
- जिनराज ना विसारो, मति जन्म वादि हारो
- जिनराज भजें, जिनराज भजें
- जिनराज मैंने तुझे अब तक
- जिनरूप प्रत्यक्ष दिखाय रहो रे
- जिनवर का मार्ग निर्ग्रन्थ मार्ग
- जिनवर की जय बोल,मुक्ति मार्ग
- जिनवर की परमार्थ भक्ति करेंगे
- जिनवर की वाणी से
- जिनवर के गुण गाओ-गाओ रे, प्रभुवर के गुण गाओ-गाओ रे
- जिनवर चरण-भक्ति वर गंगा
- जिनवर दरबार तुम्हारा
- जिनवर दर्शन का फल पाऊँ, निर्वांछक निर्द्वन्द रहाऊँ
- जिनवर दर्शन मंगलकारी, जिनवर भक्ति मंगलकारी
- जिनवर भक्ति आनंदमय हो, चरणों में शीस नवाते हैं
- जिनवर भक्ति करें भव्यजन, भाव विशुद्धि बढ़ाने को
- जिनवर भक्ति मंगलकार
- जिनवर भक्ति सुखकारी
- जिनवर सत्य है
- जिनवर सम्यक् पूजा रचाऊँ
- जिनवर-आनन-भान निहारत
- जिनवरमूरत तेरी, शोभा कहिय न जाय
- जिनवाणी अमृत झरे, पीवे सो शिव पद लहे
- जिनवाणी अमृत रसाल
- जिनवाणी का कहना है
- जिनवाणी के सुनै सों
- जिनवाणी को नमन करो
- जिनवाणी जग में सुखदाय, पढ़ो सुनो भवि शीश नवाय
- जिनवाणी जग मैया
- जिनवाणी जान सुजान रे
- जिनवाणी जीवन का आधार है
- जिनवाणी जीवन में
- जिनवाणी जीवन में, सुख का आधार है
- जिनवाणी ध्याना सभी
- जिनवाणी माँ की वंदना, उल्लास से करो
- जिनवाणी माँ तेरे चरण आया
- जिनवाणी माँ मेरे सपनों में आई
- जिनवाणी माँ सुन तो
- जिनवाणी माता आँसू बहाये
- जिनवाणी माता, जय अरहन्ता
- जिनवाणी माता दर्शन की बलिहारियाँ
- जिनवाणी माता बोधि समाधि सु पाऊँ
- जिनवाणी माता, मेरे शीश विराजो
- जिनवाणी माता रत्नत्रय निधि
- जिनवाणी मोक्ष नसैनी है
- जिनवाणी साँची माँ, जिनवाणी साँची माँ
- जिनवाणी साँची माता हमारी
- जिनवाणी साँची माता हमारी, सब ही को आनन्ददायी
- जिनवाणी सुखकारी है, सुखकारी दुखहारी है
- जिनवाणी सुन लो रे भैया
- जिनवाणी सुन हितकारी, भव बन्ध छुड़ावनहारी
- जिनवाणी सुनि उपजे आनन्द अपार
- जिनवाणी सुनो सुखकार, फाटक हिय के खुलें
- जिनवाणी स्तुति अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ
- जिनवाणी हम सबको सुखकारी, सुखकारी, आनन्दकारी
- जिनवानी जान सुजान रे
- जिनशासन अम्लान, भविजन प्रगटाओ
- जिनशासन अम्लान, भविजन प्रगटायो
- जिनेन्द्र चरण चन्द्र के
- जिनेन्द्र मूरत में हमने देखा
- जिनेश्वर के गुण गाओ रे, भक्ति हृदय में लाओ रे
- जिनेश्वर प्रभुता अपरम्पार
- जिया अब आतम हित कर रे
- जिया कब
- जिया कब तक उलझेगा
- जिया कब तक उलझेगा
- जिया जी थानें किण विध राखूं समझाय
- जिया तुम चालो अपने देस
- जिया तैं आतमहित नहिं कीना
- जिस गति में जिधर भी गयी आतमा
- जिसने जिनवाणी को अपनी, सच्ची मात बनाई
- जिसे अपने स्वरूप
- जीव तू अनादिहीतैं भूल्यौ शिवगैलवा
- जीव! तू भ्रमत सदीव अकेला
- जीव ! तैं मूढ़पना कित पायो
- जीवदया व्रत तरु बड़ो, पालो पालो बड़भाग
- जीवन के किसी भी क्षण में
- जीवन है पानी की बूंद
- जीवनके परिनामनिकी यह
- जीवराज उड़ के जाओ सम्मेद शिखर में
- जीवराज उड के जाओ सम्मेदशिखर
- जीवा ! शूं कहिये तनैं भाई
- जे दिन तुम, विवेक बिन खोये
- जे सहज होरी के खिलारी
- जै जगपूज परमगुरु नामी, पतित उधारन अंतरजामी
- जैन धरम के हीरे मोती
- जैन धर्म के हीरे मोती
- जैन ध्वज गीत: मंगलमय अरु मंगलकारी जिन-शासन ध्वज
- जैन बाल गीत
- जैन भजन संग्रह (अनुक्रमणिका सहित) — Jain Bhajan Sangrah, 2016
- जैन मंदिर हमको लागै प्यारा
- जैनधर्म का प्यारा बच्चा
- जैसो अपनो ज्ञायक भगवान, दूजो कोई नहीं
- जैसो मुनिवर करें उपकार, दूजा कोई नहीं
- जो आज दिन है
- जो इच्छा का दमन न हो तो
- जो जीवन हो तो ऐसा हो
- जो जो देखी वीतराग ने
- जो भव से तिर गये वो लोग और थे
- जो मंगल चार जगत्
- जो मङ्गल चार जगत में
- ज्ञाता दृष्टा राही हूँ
- ज्ञान का ज्ञेय बनाते चलो, समता भाव बढ़ाते चलो
- ज्ञान की चांदनी जिसके
- ज्ञान की ज्योति जलाते चलो
- ज्ञान गंगा में नित प्रति नहाओ, मैल रागादि का तुम छुड़ाओ
- ज्ञान गगन के तले
- ज्ञान दर्शन लक्षण
- ज्ञान बिन थान न पावौगे
- ज्ञान मात्र ध्रुव सुखमय ज्ञायक, अहो दृष्टि में आया
- ज्ञान सम्यक मेरा हो गया
- ज्ञान सुधारस पीजे रे भाई, सुधारस पीजे रे
- ज्ञान स्वभावी आत्मा, स्वयंसिद्ध परमात्मा
- ज्ञान स्वरूपी चेतन अनुभव में
- ज्ञान ही आत्म साधक का आख्यान है
- ज्ञान ही सुख है, राग ही दुःख है
- ज्ञानमयी चेतन तुझे जग
- ज्ञानमयी मुरली बजाये जिनवाणी
- ज्ञानमात्र ही प्रतिक्रमण है
- ज्ञानाभ्यास करो मुक्तिमार्ग मिले
- ज्ञानामृत सिन्धु रे
- ज्ञानी आत्मा ही निज रूप धारे, भेद-विज्ञान ऐसे विचारे
- ज्ञानी ऐसे होली मचाई
- ज्ञानी का धन ज्ञान
- ज्ञानी का ध्यानी का, सबका कहना है
- ज्ञानी की ज्ञान गुफा में
- ज्ञानी की निर्भयता
- ज्ञानी के सहारे हो
- ज्ञानी जीव निवार भरम तम
- ज्ञानी ज्ञानी ज्ञानी, नेमिजी ! तुम ही हो ज्ञानी
- ज्ञानी ! थारी रीति रौ अचंभौ मोनैं आवै
- ज्ञानी मुनिवर सुखी महान, सतत करें आतम का ध्यान
- ज्ञानेश्वर अन्य क्या करने जाए
- ज्ञायक उसके लक्ष्य में आवे
- ज्ञायक का ही आश्रय होवे, यही जगत में सार रे
- ज्ञायक ज्ञायक लखते लखते, बीते काल अनन्त रे
- ज्ञेय प्रतिभासें तो प्रतिभासें
- ज्यों है अकृत्रिम भाव सुखमय, यों अकृत्रिम बिम्ब हैं