जिन जपि जिन जपि, जिन जपि जीयरा | Jin Japi Jin Japi, Jin Japi Jeeyara

जिन जपि जिन जपि, जिन जपि जीयरा

जिन जपि जिन जपि, जिन जपि जीयरा

प्रीति करि आवै सुख, भीति करि जावै दुख,
नित ध्यावै सनमुख, ईति न आवे नीयरा ॥ जिन. ॥ १ ॥

मंगल प्रवाह होय, विघनका दाह धोय,
जस जागै तिहुँ लोय, शांत होय हीयरा ॥ जिन. ॥ २ ॥

‘द्यानत’ कहाँ लौं कहै, इन्द्र चन्द्र सेवा बहै,
भव दुख पावकको, भक्ति नीर सीयरा ॥ जिन. ॥ ३ ॥


Artist: पं. द्यानतराय जी
स्रोत: आध्यात्मिक भजन संग्रह (सं. श्री सौभाग्यमल जैन, पं. टोडरमल स्मारक ट्रस्ट, जयपुर, २००६), भजन ७३

अर्थ

हे जीव ! तू जिनेन्द्र का बन्दन, स्तवन व नमन करते हुआ उनका निरंतर जाप

स्रोत: द्यानत भजन सौरभ, पद 174।

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