जाकौं इंद अहमिंद भजत | Jakaun Ind Ahamind Bhajat

जाकौं इंद अहमिंद भजत

जाकौं इंद अहमिंद भजत, चंद धरनिंद भजत,
व्यंतर के ईश भजत, भजत लोकपाल ॥टेक॥

राम भजत काम भजत, चक्री प्रतिकेसो भजत,
नारद मुनि कृष्ण रुद्र, भजत गुनमाल ॥
जाकौं इंद अहमिंद भजत, चंद धरनिंद भजत,
व्यंतर के ईश भजत, भजत लोकपाल ॥१॥

श्रुत-ज्ञानी औधि-ज्ञानी, मनपर्जे ज्ञानी ध्यानी,
जपी तपी साधु सन्त, भजत तिहूँ काल ॥
जाकौं इंद अहमिंद भजत, चंद धरनिंद भजत,
व्यंतर के ईश भजत, भजत लोकपाल ॥२॥

राग-दोष-भाव-सुन्न, जाके नहिं पाप पुन्न,
ऐसे आदिनाथ देव, ‘द्यानत’ रखवाल ॥
जाकौं इंद अहमिंद भजत, चंद धरनिंद भजत,
व्यंतर के ईश भजत, भजत लोकपाल ॥3॥


Artist: पं. द्यानतराय जी
स्रोत: nikkyjain.github.io (पं द्यानतराय कृत भजन)

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