जयवन्तो प्रभु वीर हमारे, जयवन्तो प्रभु वीर | jayavanto prabhu vira hamare jayavanto prabhu vira

तर्जः वीर भज ले रे भाया वीर भज ले …

जयवन्तो प्रभु वीर हमारे, जयवन्तो प्रभु वीर।

शासन नायक धीर हमारे, जयवन्तो प्रभु वीर ।। टेक ।।

मंगल दिव्यध्वनि दर्शाती, आत्म स्वरूप महान्।
विन्मूरति-चिन्मूरति अनुपम, है अक्षय गुणखान।। 1।
मुक्तिमार्ग बतलाया जग को, किया महा उपकार।
सर्व समर्पण करूँ तथापि, होय न प्रत्युपकार।। 2।।

चरण-शरण में आये प्रभुवर, कटें कर्म के फन्द।
आज निहारा द्रव्यदृष्टि से, आतम पूर्ण अबन्ध।। 3।।

भ्रम से भूला था निज वैभव, आज हुआ भ्रम दूर।
प्रभो ! हुआ मेरे अन्तर में, परमानन्द भरपूर ।। 4।।

अब तुम सम ही निज में थिर हो, बैठूं पास तुम्हारे ।
दर्शन पाया प्रभो आपका, धनि-धनि भाग्य हमारे।। 5।।


स्रोत: जिन भक्ति सिंधु, पृष्ठ १२४
Artist: ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’