जिनमंदिर है हमको मंगल शरण | jinamamdira hai hamako mamgala sharana

तर्जः जैन मंदिर हमको लागे प्यारा…

जिनमंदिर है हमको मंगल शरण ।। टेक ।।

श्री जिनबिम्ब विराजत ऐसे, मानो हों प्रत्यक्ष तारण-तरण।
दर्शन करत सफल हो जीवन, हो भेद-विज्ञान मोह हरण ।। 1 ।।

जिनश्रुत की चर्चा सुखकारी, वस्तु स्वरूप स्पष्ट करन।
तत्त्वों का सम्यक् निर्णय करावे, आत्मानुभव की लागे लगन ।। 2 ।।

विषय आरम्भ कुसंगति छूटे, धर्मीजनों का सहज हो मिलन।
आराधन में उत्साहित हो, स्वयमेव थिर होय चंचल सु मन ।। 3 ।।

भाव विशुद्धि आत्म शान्ति के निमित्तभूत मंदिर को नमन।
निज मंदिर में निवसूँ शाश्वत, चैतन्य प्रभु में ही होऊँ मगन ।। 4 ।।


स्रोत: जिन भक्ति सिंधु, पृष्ठ १८
Artist: ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’