जिया तुम चालो अपने देस | Jiya tum chalo apne desh

जिया तुम चालो अपने देस, शिवपुर थारो शुभथान।
लख चौरासी में बहु भटके, लह्यो न सुख को लेस ॥
मिथ्या रूप धरे बहुतेरे, भटके बहुत विदेस।
विषयादिक से बहु दुख पाये, भुगते बहुत कलेस ॥
भयो तिर्यंच नारकी नर सुर, करि करि नाना भेस।
‘दौलतराम’ तोड़ जग-नाता, सुनो सुगुरु उपदेस ॥

Artist: कविवर श्री दौलत राम जी

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अर्थ

हे जीव ! तुम अपने देश में चलो। शिवपुर/मोक्ष ही तुम्हारा स्थान है और वह शुभ स्थान है।

चौरासी लाख योनियों में बहुत भटक लिये, परंतु कहीं पर तनिक-सा भी सुख नहीं मिला।

अनेक मिथ्यावेश-रूप तुमने धारण किए और अनेक विदेशों, जो तुम्हारे अपने देश नहीं है, में तुम भटकते रहे।

इन्द्रिय-विषयों के कारण बहुत दुःख पाए और बहुत संक्लेश सहे। चारों गतियों - तिर्यंच, मनुष्य, नरक और स्वर्ग आदि में अनेक रूप में जन्म लिया।

दौलतराम कहते हैं कि हे जीव! तुम सत्गुरु का उपदेश सुनो और इस जगत से अपना नाता - संबंध तोड़ लो।

स्रोत: दौलत भजन सौरभ, पद 88।

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