छोड़ो-छोड़ो रे विषय-कषाय आलस को,
प्रभु की भक्ति करो सुखदाय ।। टेक।।
महाभाग्य से मिल गये, हमको जिनवर देव ।
जिनके दर्शन से कटे, मोह जाल स्वयमेव ।। 1 ।।
देखो सारे जगत् में, जिनवर सम नहीं आन ।
जो जिनपद आराधता, होय स्वयं भगवान् ।। 2 ।।
परम ब्रह्म परमात्मा, परमानन्द स्वरूप।
दर्शायो आदेय प्रभु, चिदानन्द चिद्रूप ।। 3।।
चिदानन्द का ध्यान धर, सर्व विकल्प विडार ।
पायो प्रभु परमात्म पद, नमों त्रियोग सम्हार ।। 4 ।।
स्रोत: जिन भक्ति सिंधु, पृष्ठ ८६
Artist: ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’
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