तर्ज : तेरी प्यारी - प्यारी सूरत को
जिनराज तुम्हारी मूरत की, छवि चन्दा किरण सी लगे ।
प्रभु महावीर ऽऽ ।।
मुखड़े की चमक तो आतम को, मानो सम्यक् किरण सी लगे ।।
प्रभु महावीर ऽऽ ।। टेक ।।
मन दरशन को पाता है, राही वहीं रुक जाता है।
देख के तेरी मूरत सुहानी, सूर्य भी सर को झुकता है।
चरणों की प्रभा तो दुनियाँ को, मानो सम्यक् किरण सी लगे ।।
प्रभु महावीर ऽऽ ।। 1 ।।
जिनराज तुम्हारी मूरत की ……………
मन मन्दिर में रहा करो, सब के दुःख को हरा करो ।
ज्ञान की ज्योति से जिनवर तुम, धर्म की ज्योति दिया करो ।
प्रभु वाणी सुधा तो दुनिया को, मानो आनन्द किरण सी लगे ।।
प्रभु महावीर ऽऽ ।। 2 ।।
जिनराज तुम्हारी मूरत की ……………
सात सुरों की बीन बजी, जिन दर्शन की धूम मची ।
नयन तिहारे दर्शन पावें, मंगल की शहनाई बजी ।
यह दिव्य तुम्हारी ज्योति तो, मानो मुक्ति किरण सी लगे ।।
प्रभु महावीर ऽऽ ।। 3 ।।
जिनराज तुम्हारी मूरत की ……………
ककककक卐ककककक
ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’ की कलम से…!
ज्ञानी भावे भावना, यह संसार असार ।
यामें सुख किंचित् नहीं निज ज्ञायक ही सार ॥
स्रोत: जिनवर भक्ति शतक (सामूहिक जिनेन्द्र पूजन समिति, कोटा)
संकलन: विक्रान्त कुमार जैन · सम्पादन: डॉ. वैद्य दीपक जैन