झूँठे झगड़े के झूले पर झोटे खा रहा है यार | Jhoonthe Jhagde Ke Jhoole Par Jhote Kha Raha Hai Yaar

झूँठे झगड़े के झूले पर झोटे खा रहा है यार

झूँठे झगड़े के झूले पर झोटे खा रहा है यार ॥टेक ॥

माता बहिना चाची ताई और सकल परिवार ।
स्वार्थ के साथी हैं तेरे कोई नहीं गम ख्वार ॥१॥

लगा लिया दिल से किस किस की उल्फत का आजार ।
कोई नहीं सहायक होगा तेरा आखिरकार ॥२॥

खाम ख्याली छोड़ बावले जाली है संसार ।
ऐसा मौका फिर न मिलेगा अपना जन्म सुधार ॥३ ॥

अब भी सोच समझ मत मूर्ख जीती बाजी हार ।
रूपराम जायेगा इक दिन खाली हाथ पसार ॥४॥


स्रोत: आध्यात्मिक भजन संग्रह (सं. श्री सौभाग्यमल जैन, पं. टोडरमल स्मारक ट्रस्ट, जयपुर, २००६), भजन ५४ (विभिन्न कवियों के भजन)

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