चेतो हे! चेतन राज, चेतन बोले है
चेतो हे! चेतन राज, चेतन बोले है।
जानो अब निज पर काज, वीरा बोले है॥
अपने समान सब जीव, दिव्यध्वनि बोले है।
नहिं रंच मात्र भी भेद, जिनवर बोले है॥१॥
ऊपर से भेद ही जान, गणधर बोले है।
आतम सब निज पहचान, गुरूवर बोले है॥२॥
जिनवाणी सच्चा ज्ञान, अमृत घोले है।
लख चौरासी दुख हान, प्रभुवर बोले है॥३॥
अब कर लो भेद-विज्ञान, हम सब डोले है।
भव भ्रमण का हो हान, निज-रस जो ले है॥४॥
सिद्धातम पद ही सार, जिनागम बोले है।
निज आतम ही इक सार, वीर प्रभु बोले है॥५॥
स्रोत: आध्यात्मिक भजन संग्रह (सं. श्री सौभाग्यमल जैन, पं. टोडरमल स्मारक ट्रस्ट, जयपुर, २००६), भजन ९६ (विभिन्न कवियों के भजन)