चलो रे भाई सिद्धपुरी
देखो खडा है विमान महान, चलो रे भाई सिद्धपुरी ।
वायुयान आया है सीट सुरक्षित अभी करालो ।
सम्यक् दर्शन ज्ञान चरित के तीनों पास मंगालो ।।देखो।।१।।
नरभव से ही यह विमान सीधा शिवपुर जाता है ।
जो चूका वह फिर अनन्त कालों तक पछताता है।।देखो ।।२।।
रत्नत्रय की बर्थ संभालो शुद्धभाव में जीलो ।
निज स्वभाव का भोजन लेकर ज्ञानामृत जल पीलो ।।देखो ।।३।।
निज स्वरुप में जागरुक जो उनको पहुँचाएगा ।
सिद्ध शिला सिंहासन तक जा तुमको बिठलाएगा ।।देखो ।।४।।
मुक्ति भवन में मोक्ष वधू वरमाला पहनाएगी ।
सादि अनंत समाधि मिलेगी जगती गुण गाएगी ।।देखो।।५।।
Artist: कवि राजमल जी पवैया
स्रोत: जैन पूजांजलि (श्री रूपचन्द्र सुशीलाबाई दि. जैन ग्रंथमाला, विदिशा, १९९२), प्रारम्भिक भजन