जिनधर्म का झंडा केशरिया, हम सबका झंडा केशरिया।
मोह भगाता-ज्ञान जगाता, प्यारा झंडा केशरिया ।। टेक।।
इस झंडे के नीचे आओ, शुभ संकल्प सभी दोहराओ।
सत्य-अहिंसा को अपनाओ, न्याय-नीति जीवन में लाओ ।।1।।
मैत्री-भाव सभी जीवों में, करुणा भाव सदा दुखियों में।
माध्यस्थ हो विपरीतों में, सहज हर्ष हो गुणीजनों में ।।2।।
सदा विचारें मर्यादा में, बोलें भी हम मर्यादा में।
परिग्रह की मर्यादा पालें, दूषण शील भाव के टालें ।।3।।
हो सम्यक् श्रद्धान हमारा, प्रमाणीक हो ज्ञान हमारा।
योग्य पवित्र चारित्र हमारा, रत्नत्रयमय मार्ग हमारा ।।4।।
जाननहार स्वरूप हमारा, परम मोक्ष है साध्य हमारा।
शुद्धातम ध्रुव ध्येय हमारा, अहो ह्रदय में हमने धारा ।।5।।
वीतराग हैं देव हमारे, गुरु निर्ग्रन्थ हमें हैं प्यारे।
स्याद्वादमय श्री जिनवाणी, महाभाग्य हमने पहिचानी ।।6।।
अरे मूढ़ता दूर भगाओ, स्व-सन्मुख पुरुषार्थ जगाओ।
जिनशासन की शरण में आओ, झंडे को नित शीश नवाओ ।।7।।
मोह विजय हो इन्द्रिय जय हो, दुर्भावों पर सहज विजय हो।
तत्त्व भावना मंगलकारी, हो प्रभावना आनंदकारी ।।8।।
रचियता - पूजनीय बाल ब्रह्मचारी पंडित श्री रवीन्द्र जी आत्मन्
Source - जिन भक्ति सिंधु