जानौं पूरा ज्ञाता सोई
जानौं पूरा ज्ञाता सोई ॥टेक॥
रागी नाहीं रोषी नाहीं, मोही नाहीं होई ॥
क्रोधी नाहीं मानी नाहीं, लोभी धी ना ताकी ।
ज्ञानी ध्यानी दानी जानी, बानी मीठी जाकी ॥
जानौं पूरा ज्ञाता सोई ॥१॥
सांई सेती सच्चा दीसै, लोगों का प्यारा ।
काहू जीका दोषी नाहीं, नीका पैंडा धारा ॥
जानौं पूरा ज्ञाता सोई ॥२॥
काया सेती माया सेती, जो न्यारा है भाई ।
‘द्यानत’ ताको देखै जाने, ताहीसों लौ लाई ॥
जानौं पूरा ज्ञाता सोई ॥३॥
Artist: पं. द्यानतराय जी
स्रोत: nikkyjain.github.io (पं द्यानतराय कृत भजन)
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