तर्ज : देवों के देव श्री जिनदेव
चैतन्यनाथ जय जय चैतन्यनाथ । ।टेक ।।
देवों का देव नाथों का नाथ, कारण परमात्मा चैतन्यनाथ ।।1।।
निरपेक्ष स्वाधीन शाश्वत विराजे, अपने ही अंतर में चैतन्यनाथ ।। 2 ।।
अचिन्त्य शक्ति स्वयमेव देव, सांची चिन्तामणि चैतन्यनाथ ।।3।।
नित्य-निरंजन सच्चिदानन्दमय, अनाथ मुक्ति सुन्दरी का है नाथ ।। 4 ।।
सहज पूज्य है ध्रुव परमेष्ठी, तारण तरण अपना चैतन्यनाथ ।।5।।
जाने बिना रे बहु दुःख पाये, जग में निभाये न कोई भी साथ ।।6।।
अन्तर्मुख हो दर्शन कर लो, नाथ के आश्रय से होओ सनाथ ।।7।।
चैतन्यनाथ के आश्रय से ही, दुःखों से मुक्त होओ मुक्ति के नाथ ।।8 ।।
स्रोत: भक्ति-भावना (द्वितीय खण्ड)
Artist: श्री ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’
स्रोत: डॉ. विनोद ‘चिन्मय’