प्रूफरीडिंग बाकी है
ये बोल रिकॉर्डिंग से मशीन द्वारा लिखे गए हैं, इनमें अशुद्धियाँ हो सकती हैं।
जब तेरी डोली निकाली जाएगी,
बिन मुहूरत के उठा ली जाएगी ।
उन हकीमों से ये कह दो बोलकर,
दावा करते थे किताबें खोलकर ।
ये दवा हरगिज न खाली जाएगी ।।1।।
क्यों गुलों पर हो रही बुलबुल निसार,
है खड़ा पीछे शिकारी खबरदार ।
मार कर गोली गिरा ली जाएगी ।।2।।
ऐ मुसाफिर क्यों पसरता है यहाँ,
ये मिला तुझको किराये का मकां ।
कोठरी खाली करा ली जाएगी ।।3।।
जर सिकंदर का यहीं पर रह गया,
मरते दम लुकवान भी यूँ कह गया ।
ये घड़ी हरगिज न खाली जाएगी ।।4।।
चेत भैया अब श्री जिनवर भजो,
मोहे रूपी नींद को जल्दी तजो ।
वरना ये पूँजी उठा ली जाएगी ।।5।।
रचयिता : अज्ञात
स्वर : पण्डित श्री मांगीलाल जी, कोलारस
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स्रोत: JinSwara ऑडियो संग्रह।