जैसा जो करता है भरता है यहीं देख लिया
जैसा जो करता है भरता है यहीं देख लिया ।
करम का टाला नहीं टलता है फल देख लिया ॥
बद से बद, नेक से नेकी का समर मिलता है।
आज जो जैसा किया वैसा ही कल देख लिया ॥
हरके सीता को जो रावण ने कुमत ठानी थी ।
आप मारा ही गया हरने का फल देख लिया ॥
न्यायमत जो कोई कलपाता है जिया औरों का ।
याद रक्खो वह भी कल पायेगा कल देख लिया ॥
स्रोत: आध्यात्मिक भजन संग्रह (सं. श्री सौभाग्यमल जैन, पं. टोडरमल स्मारक ट्रस्ट, जयपुर, २००६), भजन ७० (विभिन्न कवियों के भजन)