चेतन उलटी चाल चले | Chetan Ulti Chaal Chale

चेतन उलटी चाल चले |
जड संगत तैं जडता व्यापी निज गुन सकल टले || टेक ||

हित सों विरचि ठगनि सों रचि, मोह पिशाच छले |
हंसि हंसि फंद सवारि आप ही, मेलत आप गले || १ ||

आये निकसि निगोद सिंधु तें, फिर तिह पंथ चले |
कैसे परगट होय आग जो, दबी पहार तले || २ ||

भूले भव भ्रम बीचि, ‘बनारसी’ तुम सुरज्ञान भले |
धर शुभ ध्यान ज्ञान नौका चढ़ि, बैठें तें निकले || ३ ||

Artist - पं. श्री बनारसीदासजी