चेतन निधी अपनी है, ज्ञायक निधी अपनी है | Chetan Nidhi Apni Hai, Gyayak Nidhi Apni Hai

चेतन निधी अपनी है, ज्ञायक निधी अपनी है

चेतन निधी अपनी है, ज्ञायक निधी अपनी है॥टेक॥

इसे भूल महा दुख पाये, कर जन्म मरण भरमाये ।
यह भव दुःख हरनी है ॥१॥

अब चेत मूढ़ अज्ञानी, परपरणति तज दुःख दानी ।
भज समता बोधि सुखदानी जो तू चिर बिसरी है ॥२॥


स्रोत: आध्यात्मिक भजन संग्रह (सं. श्री सौभाग्यमल जैन, पं. टोडरमल स्मारक ट्रस्ट, जयपुर, २००६), भजन ५६ (विभिन्न कवियों के भजन)