जम आन अचानक दाबैगा
जम आन अचानक दाबैगा ।।टेक।।
छिनछिन कटत घटत थित ज्यौं जल, अंजुलिको झर जावैगा ।
जन्म तालतरुतैं पर जियफल, कोंलग बीच रहावैगा ।
क्यौं न विचार करै नर आखिर, मरन महीमें आवैगा ।।१।।
सोवत मृत जागत जीवत ही, श्वासा जो थिर थावैगा ।
जैसैं कोऊ छिपै सदासौं, कबहूं अवशि पलावैगा ।।२।।
कहूं कबहूं कैसें हू कोऊ, अंतकसे न बचावैगा ।
सम्यकज्ञानपियूष पिये सौं, ‘दौल’ अमरपद पावैगा ।।३।।
Artist: कविवर श्री दौलत राम जी
स्रोत: दौलत भजन सौरभ, पृष्ठ १७४