चेतन स्वयं बनो भगवान्, नैक जल्दी निर्णय कीजो | chetana svayam bano bhagavana naika jaldi nirnaya kijo

चेतन स्वयं बनो भगवान्, नैक जल्दी निर्णय कीजो।

बीतो बीतो रे जमानो, नैक जल्दी निर्णय कीजो ॥ टेक ॥
कौन को चेतन भूल गयो है, कौन को अपना माना।
शुद्धातम को भूल गया है, पर को अपना माना॥ 1 ॥

काहे में तूने सुख माना, काहे में दुःख जाना।
भोगों में तूने सुख माना, कष्ट धर्म में जाना ॥ 2 ॥

इह विधि दुःख को अन्त न आवे, व्यर्थ नहीं भरमाना।
पर में सुख नहीं है तेरा, फिर कैसे हो पाना॥ ३॥

यदि सुख की अभिलाषा चेतन, कर तू भेद-विज्ञाना।
आतम श्रद्धा अनुभव थिरता, करो बनो भगवाना॥ 4 ॥


स्रोत: जिन भक्ति सिंधु, पृष्ठ ३५४
Artist: ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’