चरणन चिह्न चितारि चित्त में वन्दन जिन चोबीस करूँ रे
(राग भैरवी)
चरणन चिह्न चितारि चित्त में वन्दन जिन चोबीस करूँ रे ॥टेर ॥
रिषभ, वृषभ गज अजितनाथ के संभव के पद वाज सरूँ।
अभिनन्दन कपि, कोक सुमति के पदम पदम प्रभु पायधरूँ॥१॥
स्वस्ति सुपारस चन्द चन्द्र के पुष्पदन्त के पद मधरू ।
सुर तरु शीतल चरण कमल में श्रेयांश गैंडा वन करू ॥२॥
भैंसा वास, वराह विमलपद अनन्तनाथ के सेही परूं ।
धर्मनाथ अंकुश शान्ति हिरन अज कुंथनाथ अरमीन धरूँ॥३॥
कलश मल्लि कछ मुनिसुव्रत नमि कमल सतपत्र तरू ।
नेम शंख फनि पास, वीर हरि, लखि बुधजन आनन्द भरूं ॥४॥
Artist: पं. बुधजन जी
स्रोत: आध्यात्मिक भजन संग्रह (सं. श्री सौभाग्यमल जैन, पं. टोडरमल स्मारक ट्रस्ट, जयपुर, २००६), भजन ३३ (विभिन्न कवियों के भजन)