जिनमंदिर है जग में अशरण-शरण | jinamamdira hai jaga mem asharana sharana

तर्जः जैनमंदिर हमको लागे प्यारा …

जिनमंदिर है जग में अशरण-शरण,
जिनमंदिर है जग में तारण-तरण।
जिनमंदिर में होवे पूजन भजन,

जिनमंदिर में प्रवचन हों आनन्द करण ।। टेक ।।

मोह मिटावे, ज्ञान जगावे,
पाप नशावे, निर्मलता आवे।
धर्म ध्यान की लागे लगन ।। 1।।

धन्धा छूटे, संज्ञा छूटे,
विकथा- निद्रा- आलस छूटे।
तत्त्वों की श्रद्धा होवे पावन ।। 2।।

प्रभुवर को देखे, शुद्धातम दीखे,
रागादि न्यारे निस्सार दीखे।
वैराग्य-भावना हो सुख करण।। 3।।

करें, करावें, अनुमोदन लावें,
धर्म के नाना उत्सव रचावें।
होवे प्रभावना मंगलकरण।। 4।।

आओ जिनमंदिर में आओ,
दर्शनकर सब दुःख मिटाओ।
धर्मी में होवे जीवन अर्पण ।। 5।।


स्रोत: जिन भक्ति सिंधु, पृष्ठ १७
Artist: ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’