तर्जः जय पारस…
जय नेमीश्वर-जय नेमीश्वर, जय नेमीश्वर स्वामी ।
वीतराग सर्वज्ञ हितंकर, जय नेमीश्वर स्वामी।। टेक ।।
अष्टादश दोषों से न्यारे, वीतराग अभिरामी ।
नित्य निरंजन भव दुख भंजन, चरणन शीस नमामी ।। 1 ।।
झलके लोकालोक ज्ञान में, ज्ञानमयी हे स्वामी।
निजानन्द में लीन जिनेश्वर, धनि-धनि केवलज्ञानी ।। 2 ।।
ध्रुव आनन्दमय शुद्धातम, दर्शायो त्रिभुवननामी ।
धर्मतीर्थ के सहज प्रणेता, परम हितंकर स्वामी ।। 3।।
धन्य हुआ कृतकृत्य हुआ, प्रभु दर्शन पाकर स्वामी ।
यही भावना निर्विकल्प हो, होऊँ शिवपथ गामी।। 4।।
स्रोत: जिन भक्ति सिंधु, पृष्ठ १०५ से १०६
Artist: ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’