चैतन्यनाथ सु जयवन्त वर्ते | Chetanya nath su jayvant varte

adhyatm
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जयवन्त वर्ते, जयवन्त वर्ते, चैतन्यनाथ सु जयवन्त वर्ते ।।
जयवन्त वर्ते, जयवन्त वर्ते, आत्मानुभूति सु-जयवन्त वते ।।टेक।।

मोह क्षोभ से रहित साम्यमय, आनन्दमय धर्म जयवन्त वर्ते ।
भव दुख हर्ता शिव सुख कर्ता, श्री जिनधर्म सु-जयवन्त वर्ते ।।1।।

देवाधिदेव वीतराग सर्वज्ञ, परमोपकारी सु-जयवन्त वर्ते।
जिनवर समवशरण श्री जिनवाणी, जयवन्त वर्ते, जयवन्त वर्ते ।।2।।

तिलोक भूषण, रत्नत्रय भूषित, निर्ग्रन्थ साधु सु जयवन्त वर्ते।
मंगलमय लोकोत्तम अशरण शरण जो, निर्ग्रन्थ मारग सु जयवन्त वते ।।3।।

जिन मन्दिर, जिनबिम्ब जिनतीर्थ जग में, जयवंत वर्ते, जयवंत वर्ते।
सब जीव समझे वस्तु स्वरूप, परम अहिंसा सु-जयवंत वर्त । 4 ।।।

Artist: ब्र. श्री रवीन्द्र जी ‘आत्मन्’

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