जिनवर सम्यक् पूजा रचाऊँ | Jinavar Samyak Puj Racau

तर्ज : नाथ तेरी पूजा को फल पायो…

जिनवर सम्यक् पूजा रचाऊँ।

सहज पूज्य पद ध्याऊँ स्वामिन्, स्वयं पूज्य कहलाऊँ । ।टेक ।।

अहो नाथ हो अन्तर्यामी, तुमसों कहा छिपाऊँ ?
दोष अनन्त भये भव-भव में, तिनकों सहज नशाऊँ ।। 1 ।।

देव ! स्वभाव अरु परभावों को, भिन्न-भिन्न सु-लखाऊँ।
उदासीन हो परभावों से, चित्स्वरूप निज भाऊँ ।।2।।

सारभूत आतम ही दीखे, निर्ग्रन्थ रूप रहाऊँ।
परमानन्द स्वयं में प्रगट्यो, निज में ही रम जाऊँ ।।3।।


स्रोत: भक्ति-भावना (द्वितीय खण्ड)
Artist: श्री ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’
स्रोत: डॉ. विनोद ‘चिन्मय’