जिनभक्ति अमृतमयी, सब दुःख दूर करे
जिनभक्ति अमृतमयी, सब दुःख दूर करे ।
जिनपूजा आनंदमयी, परमानंद करे ।।टेक।।
अरहन्त सिद्ध प्रभु मंगलमय हैं, सर्वसाधु गुरु मंगलमय हैं ।
जिनधर्म मंगलमयी, सब दुख दूर करें ।।1।।
अर्हन्त सिद्ध प्रभु लोकोत्तम हैं, सर्वसाधु गुरु लोकोत्तम हैं ।
जिनधर्म लोकोत्तमा, सब दुख दूर करे ।।2।।
अर्हन्त सिद्ध प्रभु सदा शरण हैं, सर्व साधु गुरु सदा शरण हैं ।
जिनधर्म शरण सुखकार, सब दुख दूर करे ।।3।।
मंगलमय है निज शुद्धातम, लोकोत्तम है ध्रुव परमातम ।
अनन्य शरण अविकार, सब दुख दूर करें ।।4।।
महाभाग्य जिनदर्शन पाया, साँचा मुक्तिमार्ग दर्शाया ।
नमहुँ त्रियोग सम्हार, सब दुख दूर करे ।।5।।
स्रोत: जिनवाणी भक्ति, पृष्ठ ५४